निर्माण उद्योग Nirman Udhhog subjective question 2023

निर्माण उद्योग Nirman Udhhog subjective

लघु उत्तरीय प्रश्न 

प्रश्न 1. सार्वजनिक और निजी उद्योग में अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर- सार्वजनिक – उद्योग इसका संचालन सरकार स्वयं करती है । इसमें भारी तथा आधारभूत उद्योग सम्मिलित है। दुर्गापुर, भिलाई, राउरकेला, भारतीय हैवी इलेक्ट्रिकल लिमिटेड, सेल आदि । निजी उद्योग — इसमें उद्योग पर नियंत्रण निजी व्यक्तियों का होता था। निजी लाभ के उद्देश्य से ही इनका उपयोग किया जाता है। जैसे-टाटा इस्पात उद्योग, रिलायंस इंडस्ट्रीज ।


 प्रश्न 2. उद्योग पर्यावरण को कैसे प्रदूषित करती है ? लिखें।
उत्तर – वर्तमान समय में उद्योगों ने प्रदूषण को बढ़ाया है और पर्यावरण को दूषित किया है। उद्योगों ने चार प्रकार के प्रदूषण वायु, जल, भूमि एवं ध्वनि को बढ़ाया है । उद्योगों से निकलने वाले धुएँ वायु को बुरी तरह प्रदूषित किया है। उद्योग द्वारा अवशिष्ट पदार्थों द्वारा नदियों तालाबों में छोड़ा जाता है। उससे जल प्रदूषण होता है। ध्वनि प्रदूषण उद्योग एवं परिवहन की देन है। तापीय प्रदूषण-उद्योगों तथा तापों से गर्म जल को बिना ठंडा किए ही नदियों तथा तालाबों में छोड़ दिया जाता है तो जल में तापीय प्रदूषण होता है ।


प्रश्न 3. उद्योगों के स्थानीयकरण के तीन कारकों को लिखिए।
उत्तर- किसी उद्योग को स्थापित करने में कई कारकों का योगदान होता है। इन कारकों को दो वर्गों-भौतिक और मानवीय कारकों में रखा जाता है। कच्चा माल, शक्ति के साधन, जल की सलुभता तथा अनुकूल जलवायु भौतिक कारक हैं। मानवीय कारक श्रमिक, बाजार, परिवहन, पूँजी, सरकारी नीतियाँ हैं।


प्रश्न 4. लोहा एवं इस्पात उद्योग को बुनियादी उद्योग क्यों कहा जाता है? अथवा, लोहा-इस्पात उद्योग को आधारभूत उद्योग क्यों कहा जाता है ?
उत्तर-लौह-इस्पात उद्योग को आधारभूत उद्योग इसलिए कहते हैं कि अन्य उद्योगों के लिए मशीनें, कल-पूर्जे, परिवहन के विभिन्न साधनों के लिए मोटरगाड़ियाँ, इंजन तथा कृषि के विभिन्न यंत्र इसी उद्योग द्वारा बनाए जाते हैं ।


प्रश्न 5. उद्योगों के स्थानीकरण से संबंधित छह कारकों का उल्लेख करें ।
 उत्तर-उद्योगों के स्थानीकरण से संबंधित छह कारक हैं
(i) कच्चा माल,
(ii) शक्ति,
(iii) बाजार,
(iv) यातायात एवं परिवहन साधन,
(v) पूँजी एवं
(vi) सरकारी नीति ।


दीर्घ उत्तरीय प्रश्न 

 प्रश्न 1. कृषि आधारित उद्योग और खनिज आधारित उद्योग के अंतर को स्पष्ट करें।
उत्तर-कृषि पर आधारित उद्योगों को कच्चा माल कृषि से मिलता है। यह उद्योग ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर प्रदान करता है। ये अधिकतर उपभोग वस्तुओं का ही उत्पादन करते हैं। जैसे-चीनी, पटसन, वस्त्र, खनिज पर आधारित उद्योग को कच्चा माल खनिज से मिलता है। यह उद्योग ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में रोजगार प्रदान करता है। यह उपभोग्य तथा मूल पर आधारित दोनों प्रकार की वस्तुओं का उत्पादन करते हैं। जैसे-लौह इस्पात, पोत निर्माण, मशीनरी उपकरण उद्योग इत्यादि ।


 प्रश्न 2. उत्तर भारत और दक्षिण भारत के चीनी उद्योग में अंतर बताएँ।
उत्तर उत्तर भारत एवं दक्षिण भारत के चीनी उद्योग में निम्न अंतर हैं
(i) दक्षिण भारत में गन्ने की प्रति हेक्टेयर उपज अपेक्षाकृत अधिक है।
(ii) समुद्री जलवायु के कारण गन्ने में रस की मात्रा अधिक होती है।
(iii) गन्ने में अधिक शर्करा की मात्रा।
(iv) सहकारी क्षेत्र के अंतर्गत मिलों की स्थापना।
(v) मिल मालिकों द्वारा स्वयं के फार्म में गन्ने की कृषि ।
(vi) चीनी उद्योग के लिए आवश्यक बिजली भी वहाँ काफी मात्रा में उप्लब्द है।


प्रश्न 3. प्रदूषण को नियंत्रण करने के क्या-क्या उपाय हैं ?
 उत्तर-प्रदूषण को उचित योजनाओं द्वारा रोका जा सकता है
(i) वैकल्पिक ईंधन का चयन तथा उसके सही उपयोग वायु प्रदूषण रोकने के लिए।
(ii) उद्योगों में कोयले के जगह तेल के उपयोग।
(iii) उद्योगों में वायु प्रदूषणों के लिए बेजफिल्टर स्क्रबर यंत्र द्वारा।
(iv) उद्योगों के प्रदूषित जल को नदियों, तालाबों में छोड़ने के पहले उपचारित करके जल प्रदूषण को रोका जा सकता है।
(v) भूमि प्रदूषण के विभिन्न स्थानों से कूड़ा-कचरा जमा करना, कूड़े-कचरे का पुनः चक्रण कर उपयोगी बनाना ।


प्रश्न 4. भारत में नटसन (जूट) उद्योग को कौन-कौन सी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है ? किन्हीं तीन का वर्णन करें।
उत्तर- भारत में जूट उद्योग के निम्न समस्याएँ हैं
(i) जूट से बने कालीनों तथा टाट-बोरियों की माँग निरंतर कम हो रही है।
(ii) जूट से बनी वस्तुओं का मूल्य अधिक होता है। इसलिए निर्यात बाजार में इन्हें कड़ी प्रतियोगिता का सामना करना पड़ता है।
(ii) कृत्रिम धागों से बने सामान के बढ़ते हुए प्रचलन ने भी जूट उद्योग के लिए समस्या उत्पन्न कर दी है।


 प्रश्न 5. विनिर्माण से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर- वर्तमान समय में विनिर्माण उद्योग किसी भी राष्ट्र के विकास और सम्पन्नता का सूचक है। कच्चे मालों द्वारा जीवनोपयोगी वस्तुएँ तैयार करना विनिर्माण उद्योग कहलाता है। जैसें कपास से कपड़ा, गन्ना से चीनी, लौह-अयस्क, लोहा-इस्पात उद्योग, बॉक्साइट से एल्युमिनियम आदि वस्तुएँ ।इसलिए कहा जाता है कि सिर्फ मुम्बई महानगर क्षेत्र में भारत का लगभग एक-चौथाई सूती कपड़ा तैयार किया जाता है।


 

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