प्रेस सांस्कृति एवं राष्ट्रवाद ( Press Sanskriti evam Rashtravad) Subjective Question

प्रेस सांस्कृति एवं राष्ट्रवाद

Social Science Class 10th Question Answer :- प्रेस- सांस्कृति एवं राष्ट्रवाद ( Press Sanskriti evam Rashtravad) Subjective Question दोस्तों यहां पर मैट्रिक परीक्षा 2023 सामाजिक विज्ञान सोशल साइंस क्लास 10th का इतिहास का सब्जेक्टिव क्वेश्चन आंसर दिया गया है एवं इसमें प्रेस- सांस्कृति एवं राष्ट्रवाद का लघु उत्तरीय प्रश्न तथा प्रेस- सांस्कृति एवं राष्ट्रवाद का दीर्घ उत्तरीय प्रश्न दिया गया है तो इसे आप लोग शुरू से लेकर अंत तक एक बार अवश्य पढ़ें और इस वेबसाइट पर आपको प्रेस- सांस्कृति एवं राष्ट्रवाद का ऑब्जेक्टिव क्वेश्चन आंसर भी मिल जाएगा।

प्रेस और संस्कृति

> मार्टिन लूथर ने कहा” मुद्रण ईश्वर की महानतम देन है सबसे बड़ा तोहफा
> 1919 में इंडिपेंडेंस का संपादन मोतीलाल नेहरू ने किया।
> 1912 ई० में अलहिलाल पत्रिका का संपादन मौलाना आजाद ने उर्दू में किया |
> 1913 में गदर का प्रकाशन लाला हरदयाल ने किया।
> रूस जापान युद्ध 1904-05 में रूस की पराजय हुई।
> चार्ल्स मेटाकैफ को भारतीय समाचार पत्र के मुक्तिदाता के रूप में जाना जाता है।
> लॉर्ड लिटन एक सच्चा उदारवादी शासक था।
> प्रेस को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना जाता है।

18 वीं सदी के अंत तक धातु के प्रेस बनने लगे थे
> 20 वीं सदी के प्रारंभ से बिजली से चलने वाले छापे खाने में तेजी से काम करना शुरू कर दिया था।
> आधुनिक भारतीय प्रेस का आरंभ 1786 ई० में विलियम वोल्टस द्वारा एक समाचार पत्र के प्रकाशन से हुआ। 1780 में जे०के० हिक्की ने बंगाल गजट का प्रकाशन किया।
 भारतीय द्वारा प्रकाशित प्रथम समाचार पत्र 1816 ई० में गंगाधर महाचार्य का सपाहिक बंगाल गजट था।
सेवाद कौमुदी और मिरातुल पत्रों के संपादक राजा राममोहन  1831 ई० में जामेजमशेद में गोफ्तार तथा अखवारेराय थे | का प्रकाशन हुआ था | का टाइम्स ऑफ इंडिया 1861 ई० में प्रकाशित हुई |
> 1858 ई० में सोमनाथ पत्रिका इंडियन मिरर का प्रकाशन मदन 1878 में लिटन के वर्नाक्यूलर
रातो रात अपनी भाषा बदल ली थी।  कवि वचन सुधा के संपादक भारतेंदु हरिश्चंद्र थे |
> हिंदुस्तान रिव्यु का प्रकाशन सच्चिदानंद सिन्हा ने किया था।
> फिरोजशाह मेहता ने 1913 ई० में मुंबई कॉनिकल का प्रकाशन आरंभ किया। शरम पत्रिका के संपादक अरविंद घोष थे। प्रकाशन ईश्वर चंद्र विद्यासागर ने किया चाप ने किया। प्रेस एक्ट से बचने के लिए अमृत बाजार पत्रिका इंडिया तथा हरिजन पत्रिका का संपादन गांधीजी ने किया था।

आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है ।
> टस-प्लाई लुम जो जो एक चीनी नागरिक थे। उसने कपास एवं मलमल की पट्टी से कागज बनाना था।
> कागज या मुद्रण कला की शुरुआत चीन से हुई थी।
> मुद्रण कला के अविष्कार और विकास का श्रेय चीन को जाता है
> 1041 ई० में एक चीनी व्यक्ति पी संघ ने मिट्टी के मुद्रा बनाए
> 19 वीं सदी तक शंघाई प्रिंट संस्कृति का नया केंद्र बन ग
> चीनी भाषा में कुल 40,000 वर्ण अक्षर थे।
> मार्कोपोलो के द्वारा ब्लॉक प्रिंटिंग के नमूने यूरोप पहुंचे।
> 1336 ई० में प्रथम पेपर मिल की स्थापना जर्मनी में हुई।
> जर्मनी के मेजनगर में कृषक जमींदार व्यापारी परिवार में गुटेनबर्ग का जन्म हुआ
> 1440 स्कूल में गुटेनबर्ग को फर्स्ट नामक सुनार ने बाइबल पुस्तक छापने का ठेका दिया
> 42 लाइन एवं 36 लाइन वाली बाइबल पुस्तक को गुटेनबर्ग ने छापा था
> 421 लाइन वाले बाइबल का मुद्रण गुटेनबर्ग द्वारा शुरू किया गया था
> सर विलियम मैक्सटन मुद्रण कला को इंग्लैंड में लाए थे।
> इंग्लैंड में प्रथम प्रेस वेस्ट नील स्तर नामक कस्बे में हुआ |
लूथर एक धर्म सुधारक थे | पंचानवे स्थापनाए” मार्टिन लूथर की रचना है।

लघु उत्तरीय प्रश्न 

Q.1-गुटेनबर्ग ने मुद्रण यंत्र का विकास कैसे किया ?
उत्तर- गुटेनबर्ग ने मुद्रण यंत्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। गुटेनबर्ग ने हैंड प्रेस के उपयोग से प्रेस के क्षेत्र में क्रांति ला दी ही पहली पुस्तक बाइबल को छापा था |


प्रश्न.2- छापाखाना यूरोप में कैसे पहुंचा ।
उत्तर- ग्यारहवीं शताब्दी में रेशम मार्ग द्वारा कागज चीन से यूरोप पहुँचा । 13 वीं सदी के अंत में मार्कोपोलो तकनीक अपने साथ लेकर काठ की तख्ती(वुड ब्लॉक) पर छपाई की जर्मनी के योहान यूरोप गुटेबर्ग(इटली)पहुँचा । इसके बाद प्रिंटिंग में मशीन बौद्धिक का क्रांति आविष्कार ला दीया । 


प्रश्न.3- इन्क्वीजीशन से आप क्या समझते हैं । इसकी जरूरत क्यों पड़ी?
उत्तर- रोमन चर्च ने इन्क्वीजीशन नामक एक संस्था का गठन किया, जो एक प्रकार का धार्मिक न्यायालय था इसका काम धर्म विरोधियों की पहचान कर, इन्हें सजा विरोधी देना था । विचारों इसकी जरूरत को मिलने इसलिए वाले पड़ी ताकि धर्म प्रकाशकों तथ्य पुस्तक बेचने वालो पर रोक लगाकर ऐसे विचारों को फैलने से रोका जाए ।


प्रश्न.4- पाण्डुलिपि क्या है?इसकी क्या उपयोगिता है?
उत्तर- पाण्डुलिपि उस दस्तावेज को कहते हैं जो एक व्यक्ति या अनेक व्यक्तियों द्वारा हाथ से लिखी गयी हो । के जैसे पहले हस्तलिखित हाथ से लिख पत्र । कर भारत पाण्डुलिपि में छापाखाना को तैयार के विकास करने की पुरानी एवं समृद्ध परंपरा थी ।छापाखाना के आविष्कार से पूर्व पाण्डुलिपि का उपयोग भोज-पत्रों,किताबों आदि को लिखने के लिए होता था ।


प्रश्न.5- लाड लिटन ने राष्ट्रीय आंदोलन को गतिमान बनाया । कैसे?
उत्तर- देशी भाषाओं के समाचार पत्र अंग्रेजी शासन के विरुद्ध राष्ट्रवादी भावनाओं को उत्पन्न कर रहा था । ऐसे समाचार-पत्रों को नियंत्रण में लाने के लिए लाड लिटन ने 1878 ई 0 में वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट पारित किया था लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर इसका विरोध हुआ । यह एक्ट लोगों राष्ट्रीय में आंदोलन असंतोष को एवं गतिमान उबाल लाने का काम किया जो बनाया ।


दीर्घ उत्तरीय प्रश्न 

प्रश्न.1- मुद्रा के कार्यों पर प्रकाश डालें?
उत्तर- मुद्रा के कुछ प्रमुख कार्य निम्नलिखित है ।
(i) विनिमय का माध्यम- किसी वस्तु को बेचने या
खरीदने में मुद्रा माध्यम का कार्य करता है ।
(ii) मूल्य का मापक- किसी वस्तु के मूल्य को मुद्रा से
मापने है । किस वस्तु का मूल्य कितना होना चाहिए,मुद्रा द्वारा यह पता लगाना आसान हो गया है ।
(iii) विलंबित भुगतान का मान- बहुत से आर्थिक
याएँ उधार पर होती है । जाता जिसका भुगतान विलंब से
मुद्रा के माध्यम से किया 

(iv) मूल्य का संचय- किसी वस्तु या सेवा को बेचकर
प्राप्त मुद्रा का संचय लंबी अवधि तक किया जा सकता
है ।
(v) क्रय शक्ति का हस्तांतरण- मुद्रा द्वारा क्रय शक्ति का
हस्तांतरण दूसरे स्थान एक तक व्यक्ति किया से दूसरे सकता व्यक्ति या एक स्थान से
जा है ।

(vi) साख बिना का आधार- मुद्रा साख का आधार है मुद्रा के साख-पत्र जैसे- चेक,ड्राफ्ट, हुंडी आदि प्रचलन में नहीं रह सकते ।


प्रश्न.2-मुद्रण क्रांति ने आधुनिक विश्व को कैसे प्रभावित किया
उत्तर- मुद्रण क्रांति ने आम लोगों की जिंदगी ही बदल दी । मुद्रण क्रांति के कारण छापाखाना की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि हुई जिसने कई मायनों में आधुनिक विश्व को भी प्रभावित किया ।मुद्रण क्रांति के फलस्वरूप किताबें और
समाचार पत्र समाज के हर तबके के बीच पहुंच रहा था । किताबों की पहुंच आसान होने से पढ़ने की एक नई संस्कृति\ विकसित हुई । इस प्रकार एक नया पाठक वर्क अस्तित्व आया । फलस्वरुप पढ़ने के कारण उनके अंदर एक तरह पठन-पाठन से विचारों का व्यापक प्रचार-प्रसार हुआ तर्कवाद और मानवतावाद जैसी सिद्धांत अस्तित्व में आया । यूरोप में मार्टिन लूथर के नेतृत्व में धर्म सुधार आंदोलन चलाया गया प्रिंटिंग प्रेस का आविष्कार हो जाने से आम लोगों तक
पुस्तकें आसानी से पहुंचने लगी जिससे धर्म सुधार आंदोलन को और अधिक बल मिला ।इस प्रकार स्पष्ट है कि मुद्रण क्रांति के परिणाम स्वरुप बौद्धिक प्रगति और ज्ञानोदय काल का सूत्रपात हुआ । स्पष्टतः मुद्रण क्रांति ने आधुनिक विश्व


प्रश्न. 3-19 वीं सदी में भारत में प्रेस के विकास को रेखांकित
उत्तर- 19 वीं शताब्दी में भारत में प्रेस का विकास और विस्तार काफी तेजी से हुआ । उस समय प्रेस महत्वपूर्ण राजनीतिक एवं सामाजिक मुद्दों को उठाने का एक बहुत बड़ा माध्यम बन गया था ।भारतीय प्रेस का आरंभ 1766 ई. मेंविलियम वोल्टस द्वारा प्रकाशित समाचार पत्र से माना जाता है । 1780 ईस्वी में जेम्स अगस्टस हिक्की ने अंग्रेजी भाषा में बंगाल गजट नामक पत्रिका का प्रकाशन आरंभ किया । हिक्की के प्रेस को कंपनी ने जब्त कर लिया । नवंबर इस प्रकार उपरोक्त कथनों से यह स्पष्ट है कि 19 वीं शताब्दी में भारतीय प्रेस का काफी विकास हुआ । हालांकि अंग्रेजों द्वारा इसे असफल बनाने का भरपूर प्रयास किया गया परंतु फिर भी उन्हें सफलता नहीं मिली ।


प्रश्न.4-भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में प्रेस की भूमिका एवं
प्रभावों की समीक्षा करें
साधारणतया समाचार – पत्रों में प्रकाशित इन सूचनाओं और विचारों के आधार पर ही जनसाधारण अपने विचारों का निर्माण करते हैं । शिक्षा के अधिकाधिक प्रचार -प्रसार से समाचार पत्र जनमत निर्माण एवं उसकी अभिव्यक्ति के सबसे सरकार भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में प्रेस की भूमिका एवं प्रभावों की समीक्षा करें । भारत में प्रेस का विकास ब्रिटिश सरकार के निरंकुशतापूर्ण शासन में उनके विरोधों के बीच हुआ । ब्रिट्रिश शासक द्वारा समय – समय पर प्रेस पर नियंत्रण लगाने के पीछे सबसे राष्ट्रीय आंदोलन के दौरान प्रेस ने राष्ट्रवादी विचारधाराओं ,
स्वतंत्र राष्ट्रीय आंदोलन के दौरान प्रेस ने राष्ट्रवादी विचारधाराओं , स्वतंत्रता के महत्त्व तथा अंग्रेजों की दमनपूर्ण एवं शोषणकारी नीतियों का जमकर उल्लेख किया, जिसके फलस्वरूप औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध एक मानस तैयार हुआ ।यह महत्त्वपूर्ण है कि जब पत्रिकाओं का प्रकाशन प्रारंभ हुआ उस समय समाज में सुधारवादी संगठनों की स्थापना हो चुकी थी और शिक्षित समाज ने प्रेस को एक नई दिशा दी प्रेस के विकास का माध्यम राष्ट्रवादी चेतना का विकास ही था अम्बिका प्रसाद वाजपेयी ने प्रेस के विषय में ठीक ही लिखा था कि ” भारत के प्रेस व छापेखाने और समाचार – पत्र गैर- सरकारी अंग्रेजों के उद्योग से स्थापित हुए थे । शासकों के पक्ष में पशुबल था और सम्पादकों पर नैतिक बल और अंत में उनकी विजय था 


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