यूरोप में राष्ट्रवाद सब्जेक्टिव क्वेश्चन आंसर 2023 | Class 10th Social Science Europe Mein Rashtrawad Subjective Question Answer

यूरोप में राष्ट्रवाद 

Social Science Class 10th Question Answer : यूरोप में राष्ट्रवाद ( Europe me Rashtravad) Subjective Question दोस्तों यहां पर मैट्रिक परीक्षा 2023 सामाजिक विज्ञान सोशल साइंस क्लास 10th का इतिहास का सब्जेक्टिव क्वेश्चन आंसर दिया गया है एवं इसमें यूरोप में राष्ट्रवाद का लघु उत्तरीय प्रश्न तथा यूरोप में राष्ट्रवाद का दीर्घ उत्तरीय प्रश्न दिया गया है तो इसे आप लोग शुरू से लेकर अंत तक एक बार अवश्य पढ़ें और इस वेबसाइट पर आपको यूरोप में राष्ट्रवाद का ऑब्जेक्टिव क्वेश्चन आंसर भी मिल जाएगा।


 1870 ई० सेडोन  का युद्ध हुआ था ।
⇒ बिस्मार्क जो एक कूटनीतिज्ञ थे उसने रक्त और लौह नीति का अवलंबन किया था
⇒  फ्रैंकफर्ट की संधि 10 मई 1871 ई० को हुई थी |
⇒ हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट है।
एड्रियानोपुल की संधि तुर्की में हुई थी |
मैसूर का शासक टीपू सुल्तान था ।
 इटली एवं जर्मनी वर्तमान में यूरोप महादेश के अंतर्गत आते हैं।
⇒ फ्रांस में वियना कांग्रेस के द्वारा बुर्बो  वंश की पुनःस्थापना की गई।
 इटली एवं जर्मनी के एकीकरण के विरुद्ध आस्ट्रिया था |
 वियना कांग्रेस 1815 में हुआ था ।
मेटरनिख ऑस्ट्रिया का चांसलर था |
 वियना सम्मेलन के बाद नेपोलियन युग का अंत और मेटरनिख युग की शुरुआत हुई।
 फ्रांस में वियना कांग्रेस के द्वारा बुर्बो वंश की स्थापना हुई।
⇒ चाल- X एक निरंकुश एवं प्रतिक्रियावादी शासक था।
 1831 ई० में मेजनी ने यंग इटली और 1834 में यंग यूरोप की स्थापना की थी
⇒ विक्टर इमेन्यूल ने काउंट कावूर को प्रधानमंत्री के पद पर नियुक्त किया था |
  गैरीबाल्डी पेशे से एक नाविक था |
⇒  1862 में दुर्भाग्यवश काउंट कबूर की मिर्त्यु हो गयी 
 इटली के एकीकरण में मेजिनी का महत्वपूर्ण योगदान था |
हीगेल एक दार्शनिक थे
 जाल्वेरिन एक व्यापारियों की संस्था थी |
⇒जर्मन राइन राज्य का निर्माण नेपोलियन बोनापार्ट ने किया था |
 यूरोप वासियों के लिए यूनान देश का साहित्य एवं ज्ञान विज्ञान प्रेरणास्रोत रहा | 


अतिलघु उत्तरीय प्रश्न:- ( 20 शब्दों मे उत्तर दे ) 

1-राष्ट्रवाद क्या है ?
उत्तर राष्ट्रवाद एक ऐसी भावना है जो किसी विशेष भौगोलिक, सांस्कृतिक सामाजिक परिवेश में रहने वाले लोगों में एकता का वाहक होती है अर्थात अपने राष्ट्र के प्रति देश की भावना को राष्ट्रवाद कहते हैं


2-मेजनी कौन था ?
उत्तर -मेजनी साहित्यकार जनतांत्रिक विचारों का समर्थक और योग्य सेनापति था उन्होंने इटली के एकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। मेजनी ने यंग इटली एवं यंग यूरोप नामक संस्था की स्थापना


3. जर्मनी के एकीकरण की बाधाएं क्या थी?
उत्तर:- जर्मनी के एकीकरण की निम्नलिखित बाधाएं थी
(i) जर्मनी का लगभग 300 छोटे बड़े राज्यों में खंडित होना ।
(ii) जर्मनी में धार्मिक, राजनीतिक तथा सामाजिक विषमताएँ होना ।
(iii) लोगों में राष्ट्रवाद की भावना का अभाव होना ।
(iv) शक्तिशाली राज्य प्रशा द्वारा अन्य राज्यों पर प्रभाव बनाए रखनी आदि


4- मेटरनिख युग क्या है
उत्तर मेटरनिख जो आस्ट्रिया का चांसलर था, के शासनकाल को मेटरनिख युग के नाम से जाना जाता है वियना सम्मेलन के माध्यम से यूरोप में नेपोलियन युग का अंत और मेटरनिख युग की शुरुआत हुई। मेटरनिख ने इटली पर अपना प्रभाव जमा कर उसे कई राज्यों मई


लघु उत्तरीय प्रश्न:- ( 60 शब्दों मे उत्तर दे ) 

प्रश्न-1  1848 ई 0 के फ्रांसीसी क्रांति के कारण क्या थे?
उत्तर- 1948 ई 0 के फ्रांसीसी क्रांति के कारण:- 1840 ई 0 में’गीजों’को फ्रांस का प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया था । इस के शासनकाल में कोई भी सुधारात्मक कार्य नहीं सरकार हुआ जिससे के इन देश नीतियों में बेरोजगारी के खिलाफ एवं लोग भूखमरी प्रदर्शन बढ़ करने गया लगे था और जुलूस निकालने लगे जो 1848 ई 0 के फ्रांसीसी लांनि होने का कारण रहा था ।


प्रश्न-2 इटली, जर्मनी के एकीकरण में ऑस्ट्रिया की भूमिका क्या थी? 
उत्तर:- इटली और जर्मनी के एकीकरण में ऑस्ट्रिया बहुत बड़ा बाधक था । 1830 ईस्वी के क्रांति के बाद इटली में आंदोलन होना प्रारंभ हो गया था लेकिन ऑस्ट्रिया दिया गया के जिससे चांसलर मेटरनिख द्वारा आंदोलन को दबा इटली का एकीकरण धीमा पड़ गया । इसी प्रकार जर्मनी में भी मेटरनिख द्वारा राष्ट्रीय आंदोलनों को दबाया जा रहा था |


प्रश्न-3  यूरोप में राष्ट्रवाद को फैलाने में नेपोलियन बोनापार्ट किस तरह सहायक हुआ?
उत्तर:- यूरोप में राष्ट्रवाद की भावना के विकास में नेपोलियन बोनापार्ट का महत्वपूर्ण योगदान था । नेपोलियन बोनापार्ट ने जर्मन प्रदेशों को जीतकर राईन राज्य संघ का निर्माण किया था और यहीं से जर्मनी में राष्ट्रवाद की भावना बढ़ने लगी थी जो धीरे-धीरे यूरोप के अन्य क्षेत्रों में फैलने मैं लगा था |


प्रश्न-4 गैरीबाल्डी के कार्यों की चर्चा करें।
उत्तर – गैरीबाल्डी जो पेशे से एक नागरिक था वे सशस्त्र क्रांति द्वारा दक्षिणी इटली के रियासतों के एकीकरण तथा गणतंत्र की स्थापना करने का प्रयास कर रहा था। गैरीबाल्डी ने अपने सैनिकों की मदद से इटली के प्रांत शिसली तथा नेपल्स पर आक्रमण किए थे। इस प्रकार की कोई गतिविधियों में गरीबाल्डी शामिल थे।


प्रश्न- 5 विलियम- i के बगैर जर्मनी का एकीकरण बिस्मार्क के लिए असंभव था, कैसे?
उत्तर:- विलियम- i ने जर्मनी के एकीकरण के उद्देश्य से बिस्मार्क को अपना चांसलर नियुक्त किया था । जर्मनी के एकीकरण के लिए उसने अनेकों युद्ध किए और जर्मनी के एकीकरण में अपना महान योगदान दिया । यदि विलियम- i निस्पार्क को चांसलर नहीं बनाया होता तो विलियम के बगैर बिस्मार्क के लिए जर्मनी का एकीकरण करना असंभव था ।


दीर्घ उत्तरीय प्रश्न:- ( 150 शब्दों मे उत्तर दे ) 

प्रश्न-1  इटली के एकीकरण में मेजिनी, क़ाबूर और गैरीबाल्डी के योगदान को बतावें । 
उत्तर:- इटली के एकीकरण में मेजिनी, क़ाबूर और गैरीबाल्डी के योगदान निम्नलिखित हैं ।
मेजिनी का योगदान:- इनका उद्देश्य ऑस्ट्रिया के प्रभाव से इटली को मुक्त करवाना तथा इटली का एकीकरण करना था । राष्ट्रवादी भावना से प्रेरिद्ध होकर इन्होंने गुप्त क्रांतिकारी संगठन’कार्बोनरी’की सदस्यता ग्रहण की । अपने उद्देश्यों को पूरा करने के लिए उन्होंने’यंग इटली’ तथा’यंग यूरोप की भी स्थापना किया था ।

क़ाबूर का योगदान:- क़ाबूर ने भी इटली के एकीकरण में सबसे बड़ा बाधक आस्ट्रिया को मानता था 1860-61 में क़ाबूर ने सिर्फ रोम को छोड़कर उत्तर तथा इटली की सभी रियासतों को मिला लिया था और जनमत संग्रह कर  इसे पुष्टि भी कर लिया था ।

गैरीबाल्डी का योगदान:- इटली के एकीकरण में गैरीबाल्डी का महत्वपूर्ण योगदान था । ये पेशे से एक नाविक था । उन्होंने युवकों की एक सशक्त सेना”लाल कुर्ती “बनाया था । इन सैनिकों को लेकर इन्होंने सिसली तथा नेपल्स को जीत कर वहाँ गणराज्य की स्थापना किया । बाद में इन्होंने अपनी सारी संपत्ति राष्ट्र को दान कर साधारण किसान की भांति जीवन गुजरने लगे |


प्रश्न- 2 जर्मनी के एकीकरण में बिस्मार्क की भूमिका का वर्णन करें । 
उत्तर:- प्रशो का राजा विलियम प्रथम ने जर्मनी के एकीकरण को ध्यान में रखकर बिस्मार्क को अपना चांसलर नियुक्त किया । बिस्मार्क एक प्रख्यात राष्ट्रवादी और कूटनीतिज्ञ था । बिस्मार्क का मानना था कि जर्मनी का एकीकरण आदर्शवादी से नहीं बल्कि ‘रक्त और तलवार” की गति से होगा । इसके लिए । इसके लिए सबसे पहले बिस्मार्क ने आर्थिक सुधारों के द्वारा प्रशा की स्थिति को सुधारा तथा सैनिक शक्तियों को भी मजबूत किया । उन्होंने जर्मनी के एकीकरण के लिए डेनमार्क, ऑस्ट्रिया तथा फ्रांस के साथ युद्ध किया तथा सेडान के युद्ध में फ्रांसोसीयों को बुरी तरह से हराया । सेडान के युद्ध के बाद जर्मनी का उदय महाशक्ति के रूप में हुआ । इस प्रकार बिस्मार्क उपर्युक्त नीतियों द्वारा जर्मनी  के एकीकरण में महत्वपूर्ण योगदान दिया था .


प्रश्न- 3 राष्ट्रवाद के उदय के कारणों एवं प्रभाव की चर्चा करें ।
उत्तर:- राष्ट्रवाद के उदय के कारण:- 
(i) यूरोप में फ्रांसीसी क्रांति तथा नेपोलियन की विजय शक्ति से राष्ट्रवादी भावनाओं का उदय हुआ 
(ii) नेपोलियन ने अपने द्वारा विजय प्राप्त राज्यों में राष्ट्रवाद की भावना को जगाने लगा ।
(iii) शिक्षित मध्यम वर्ग जैसे- शिक्षक, व्यापारी आदि के उदय से राष्ट्रवादी भावनाओं का विकास हुआ । ऐसे वर्ग क्रांतियों में महत्वपूर्ण भूमिका अदा किया था ।

राष्ट्रवाद के उदय का प्रभाव:
(i) राष्ट्रवाद के उदय के प्रभाव से अनेक क्रांतियां और आंदोलन हुए ।
(ii)जिससे अनेक नए राष्ट्रों का उदय हुआ ।
(iii) यूरोपीय राष्ट्रवाद के विकास का प्रभाव एशिया और अफ्रीका में भी पड़ा और यहां भी राष्ट्रीय आंदोलन प्रारंभ होने लगा ।
(iv) राष्ट्रवाद के उदय के प्रभाव से निरंकुश शासकों का प्रभाव कमजोर हो गए ।
(v) राष्ट्रवाद की भावना से यूरोप के प्रत्येक शक्तिशाली राष्ट्र साम्राज्यवादी दौड़ में शामिल हो गया ।


प्रश्न-4 जुलाई 1830 ई 0 की क्रांति का विवरण दें ।
उत्तर:-जुलाई 1830 की क्रांति चार्ल्स- x के शासनकाल में हुआ था जो फ्रांस में उभर रहे राष्ट्रीयता एवं क्रांति को दबा रहा था । चार्ल्स- x ने पोलिग्नेक को प्रधानमंत्री बनाया । पोलिग्नेक प्रधानमंत्री बनने के बाद ‘समान नागरिक संहिता’ के स्थान पर’शक्तिशाली अभिजात्य वर्ग की स्थापना तथा उसे विशेष अधिकार देने का प्रयास किया ।  पोलिग्नेक के इस कदम को उदारवादियों ने अपने खिलाफ षडयंत्र समझा । प्रतिनिधि सदन एवं उदारवादियों ने पोलिग्नेक के विरोध में आवाज उठाने लगा । इस विरोध के जवाब के रूप में चार्ल्स- x ने 25 जुलाई 1830 ई 0 को चार अध्यादेशों द्वारा उदारवादियों को दबाने का प्रयास किया । फिर इन अध्यादेशों के विरोध में पेरिस में क्रांति की लहर दौड़ गई ज फ्रांस का जुलाई 1830 की क्रांति था ।


प्रश्न-5 यूनानी स्वतंत्रता आंदोलन का संक्षिप्त विवरण दें ।
उत्तरः यूनानी स्वतंत्रता आंदोलन:- यूनान का अपना गौरवमय अतीत रहा है लेकिन इसके बावजूद भी यूनान तुर्की साम्राज्य के अधीन था । फ्रांसीसी क्रांतिओं से यूनान के लोगों में भी राष्ट्रवादी भावनाओं की लहर जगी । तुर्की शासन से स्वयं को अलग करने के लिए यूनान के लोगों ने भी आंदोलन करने लगा । तुर्की शासक आंदोलन को दबाने,लगा और आंदोलन में शामिल यूनान के लोगों को बुरी तरह से कुचलने लगा । फिर लंदन में हुआ एक सम्मेलन के निर्णय अनुसार इंग्लैंड, फ्रांस तथा रूस ने मिलकर तुर्की के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई करने का निर्णय लिया । इस संयुक्त कार्रवाई से तुर्की युद्ध में बुरी तरह हार गई ।
परिणाम:- तुर्की शासन से मुक्ति पाकर यूनान एक स्वतंत्र राष्ट्र घोषित हुआ ।

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