समाजवाद एवं साम्यवाद Samajwad Aur Samyavad Subjective Question

 समाजवाद एवं साम्यवाद Samajwad Aur Samyavad

Social Science Class 10th Question Answer :- समाजवाद एवं साम्यवाद (Samajwad Aur Samyavad) Subjective Question दोस्तों यहां पर मैट्रिक परीक्षा 2023 सामाजिक विज्ञान सोशल साइंस क्लास 10th का इतिहास का सब्जेक्टिव क्वेश्चन आंसर दिया गया है एवं इसमें समाजवाद एवं साम्यवाद का लघु उत्तरीय प्रश्न तथा समाजवाद एवं साम्यवाद का दीर्घ उत्तरीय प्रश्न दिया गया है तो इसे आप लोग शुरू से लेकर अंत तक एक बार अवश्य पढ़ें और इस वेबसाइट पर आपको समाजवाद एवं साम्यवाद का ऑब्जेक्टिव क्वेश्चन आंस भी मिल जाएगा।

समाजवाद एवं साम्यवाद

⇒ समाजवादी भावना का उदय मूल्यत: 18 वीं शताब्दी में औद्योगिक क्रांति के फलस्वरूप हुआ |
⇒  कार्ल मार्क्स का जन्म 5 मई 1818 ई० को जर्मनी के राइन प्रांत के ट्रियर नगर में एक यहूदी परिवार में हुआ था।
⇒ कार्ल मार्क्स के पिता हेनरिक मोर्स जो पेशे से एक प्रसिद्ध वकील थे।
⇒  कार्ल मार्क्स ने बोन विश्वविद्यालय में विधि की शिक्षा ग्रहण की।
⇒ कार्ल मार्क्स हीगेल के विचार से प्रभावित थे |
⇒  1843 में उसने बचपन की मित्र जेली से विवाह कर लिया।
⇒  1844 में कार्ल मार्क्स फ्रेडरिक एंगेल्स से मिले।
⇒  मार्क्स ने एंजेल्स के साथ मिलकर 1848 ई० में साम्यवादी घोषणा पत्र को प्रकाशित किया | जिसे ⇒ आधुनिक समाजवाद का जनक कहा जाता है।
⇒ कार्ल मार्क्स ने दास केपिटल नामक पुस्तक की रचना की जिसे ईसाईयों का बाइबिल कहा जाता है |
⇒ 1864 ई० में प्रथम अन्तराष्ट्रीय संघ की स्थापना हुई जिसका श्रेय कार्लमाक्स को जाता है |
⇒  प्रथम अंतरराष्ट्रीय संघ में कार्लमाक्स ने के बिना अधिकार नहीं का नारा दिया था |
⇒  द्वितीय अंतरराष्ट्रीय संघ जो पेरिस में 14 जुलाई 1889 में हुआ था, में 1 मई को अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस  मनाने की घोषणा की गई।
⇒  रूस में जार का अर्थ रूस का सम्राट होता है |
⇒  बोल्शेविक क्रांति नवंबर, 1917 में हुई थी जिसे अक्टूबर क्रांति के नाम से भी जाना जाता है (पुराने कलेंडर के अनुसार ) |
⇒  वर्ष 1861 ई० में जॉर्ज अलेक्जेंडर द्वितीय द्वारा दास प्रथा को समाप्त कर दिया गया था |
⇒  क्रीमिया के युद्ध में रूस की पराजय हुई थी।
⇒  1904-05 के रूस जापान युद्ध में रूस की पराजय हुई थी
⇒  प्रथम विश्व युद्ध 1914-1918 ने बोक्रांति का मार्ग प्रशस्त किया था ।
⇒  खूनी रविवार या लाल रविवार 9 जनवरी 1905 या नये कैलेंडर के अनुसार
22 जनवरी 1905 को हुआ
⇒ 9 जनवरी 1905 को लोगों का एक समूह रोटी दो का नारा लगाते हुए सेंट पीटर्सवर्ग के महल की ओर जा रहे थे।
⇒  खूनी रविवार के बाद ड्यूमा संस्था का गठन हुआ था |
⇒ 1898 में रसियन सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी की स्थापना हुई थी।
⇒  वर्ष 1903 में बहुमत वाला दल बोल्शेविक एवं अल्पबहुमत वाला दल मेनशेविक कहलाया | 
वर्ष 1901 में सोशलिस्ट रिवॉल्युशनरी पार्टी का गठन हुआ था |
⇒  सन 1975 में संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस घोषित किया गया था।
⇒  लेनिन ने अप्रैल थेसिस’ दल की स्थापना की।
⇒  बेस्टलिटोवस्क की संधि रूस और जर्मनी के बीच हुई
⇒  लाल सेना काठन ट्राटस्की ने किया।
⇒  चेका एक पुलिस संगठन था
⇒  लेनिन ने 1921 ई० में नई आर्थिक नीति की घोषणा की थी ।
⇒  वर्ष 1924 में लेनिन की मृत्यु हो गई।
⇒  सोवियत संघ का विघटन दिसंबर 1991 ई० में हुआ था |
⇒ सर्वहारा वर्ग समाज का वैसा वर्ग जिसमें किसान, मजदूर एवं आम गरीब लोग
⇒ यूरोपीय समाजवादी कौन नहीं था- कार्ल मार्क्स
⇒  साम्यवादी शासन का पहला प्रयोग रूस में हुआ था |
⇒ कार्ल मार्क्स की मृत्यु 1883 में हुई थी।
⇒  स्टालिन की मृत्यु 1953 में हुई
⇒ (युद्ध एवं शांति) नामक पुस्तक की रचना लियो टालस्टाय ने की
अतिलघु उत्तरीय प्रश्न:- ( 20 शब्दों मे उत्तर दे ) 
प्रश्न-1 पूँजीवाद क्या है? 
उत्तर:- पूँजीवाद एक ऐसा व्यवस्था है जिसमें उत्पादन के साधनों, कारखानों आदि पर पूँजीपतियों का एकमात्र अधिकार होता है । ऐसी व्यवस्था में पूँजीपतियाँ अपने निजी लाभ के लिए बड़े पैमाने पर उत्पादन करता है और मजदूरों पर कोई विशेष ध्यान नहीं देता है, जिससे मजदूरों की स्थिति दयनीय हो जाती है ।

प्रश्न-2 खूनी रविवार क्या है?
उत्तर:- 22 जनवरी 1905(पुराने कैलेंडर के अनुसार 9 जनवरी, 1905) को लोगों का एक समूह”रोटी दो”का नारा लगाते हुए सेंट पीटर्स वर्ग स्थित महल की ओर जा रहा था । जहाँ जार की सेना ने इन निहत्थे लोगों पर अंधाधुन गोलियां चलाया जिससे हजारों लोग मारे गए । क्योंकि यह घटना रविवार के दिन हुआ था इसलिए इस दिन को “खूनी रविवार”कहा जाता है ।


प्रश्न- 3 अक्टूबर की क्रांति क्या हैं?
उत्तर:- नये कैलेंडर के अनुसार अक्टूबर की क्रांति 7 नवंबर 1917 ई 0 को रूस में हुई थी । लेकिन पुरानी रूसी कैलेंडर के अनुसार वह दिन 25 अक्टूबर 1917 ई 0 था । क्योंकि पुरानी रूसी कैलेंडर के अनुसार यह क्रांति अक्टूबर महीने में हुआ था,इसलिए यह क्रांति “अक्टूबर की क्रांति” कहलाई । इस क्रांति के बाद शासन की बागडोर बोल्शेनिकों के हाथ में आ गयी |

प्रश्न-4 सर्वहारा वर्ग किसे कहते हैं?
उत्तर:- सर्वहारा वर्ग श्रमिकों का एक ऐसा वर्ग हैं जिसमें किसान, मजदूर एवं आम गरीब लोग आते हैं । इस वर्ग को कोई विशेष सुविधा एवं अधिकार प्राप्त नहीं होता है । यह वर्ग पूँजीपतियों द्वारा शोषित वर्ग है । पूँजीपतियों द्वारा शोषित होने के कारण इनकी की स्थिति काफी दयनीय हो गई है ।
लघु उत्तरीय प्रश्न:- ( 60 शब्दों मे उत्तर दे ) 

प्रश्न-1 रूसी क्रांति के किंही दो कारणों का वर्णन करें ।
उत्तर:- रूसी क्रांति होने के निम्नलिखित दो कारण:
(i) जार का निरंकुश एवं अयोग्य शासन:- जार का शासन अफसरशाही था जो जनताओं के समस्याओं को समाधान नहीं कर पा रहा था ।
(ii) मजदूरों की स्थिति दयनीय:- जार के शासन में मजदूरों को कोई राजनीतिक अधिकार प्राप्त नहीं था जिससे मजदूर जार के शासन के प्रति संतोष नहीं थे ।


प्रश्न-2 रूसीकरण की नीति क्रांति हेतु कहां तक उत्तरदायीं थी?
उत्तर:- रूसीकरण की नीति क्रांति हेतु प्रमुख उत्तरदायीं था क्योंकि रूसीकरण की नीति द्वारा रूस के विभिन्न जाति, धर्म एवं भाषा के लोगों पर रूस का भाषा, शिक्षा और संस्कृति को लादने का प्रयास किया जा रहा था । इस नीति से असंतुष्ट लोग क्रांति के लिए प्रमुख कारण बढ़ा था


प्रश्न-3 साम्यवाद एक नई आर्थिक एवं सामाजिक व्यवस्था थी कैसे?
उत्तर:- रूस में साम्यवाद एक नई आर्थिक एवं सामाजिक व्यवस्था थी क्योंकि
(i) देश में सामाजिक असमानताओं को समाप्त कर दिया गया ।
(ii) जमींदार एवं पूंजीपति वर्ग का बोल-बाला समस्त कर दिया गया ।
(iii) काम के अधिकार को संवैधानिक अधिकार बना दिया गया ।
(iv)देश के पूरे संपत्ति का राष्ट्रीयकरण कर दिया गया ।


प्रश्न-4 नई आर्थिक नीति मार्क्सवादी सिद्धांत के साथ समझौता था कैसे?
उत्तर:- नई आर्थिक नीति -1921 के अंतर्गत लेनिन ने मार्क्सवादी सिद्धांतों के साथ समझौता कर इसे रूस में लागू किया था क्योंकि पूरे देश(रूस) में एक साथ समाजवादी व्यवस्था को लागू करना या सभी पूंजीवादी देशों से टकराना असंभव था । इस प्रकार नई आर्थिक नीति  को मार्क्सवादी सिद्धांत के साथ समझौता करना पड़ा था |

प्रश्न-5 प्रथम विश्वयुद्ध में रूस की पराजय क्रांति हेतु मार्ग प्रशस्त किया कैसे?
उत्तर:- प्रथम विश्वयुद्ध में रूस का पराजय इसलिए क्रांति हेतु मार्ग प्रशस्त किया क्योंकि प्रथम विश्वयुद्ध में रूस का पराजय होने पर रूस की जनता शासक को अयोग्य मानने लगे । पराजय होने से रूस के सम्मान को भी गहरा चोट लगा और वहाँ का जनता आक्रोशित हो उठा |


दीर्घ उत्तरीय प्रश्न:- ( 150 शब्दों मे उत्तर दे ) 

प्रश्न-1 रूसी क्रांति के कारणों की विवेचना करें ।
उत्तर:- रूसी क्रांति के निम्नलिखित कारण था ।
(i) जार का निरंकुश एवं अयोग्य शासन:- जार का शासन अफसरशाही था जो जनताओं के समस्याओं को समाधान नहीं कर पा रहा था ।
(ii)किसानों की दयनीय स्थितिः- कृषि दास्तां समाप्त होने के बाद भी किसानों की स्थिति में कोई सुधार नहीं होना ।
(iii) मजदूरों की दयनीय स्थिति:- इन्हें अधिक काम करना पड़ता था परंतु उनकी मजदूरी कम थी 
(iv) औद्योगीकरण की समस्या:- राष्ट्रीय पूंजी के अभाव में यहां औद्योगीकरण नहीं हो पाना ।
(v) रूसीकरण की नीति:- इस नीति से अल्पसंख्यक समूह का जार के प्रति आक्रोशित होना ।
(vi) मार्क्सवाद का प्रभाव:- मार्क्सवादी विचारधाराओं से रूस के मजदूरों एवं किसानों का क्रांति के लिए एकजुट होना ।
(vii) विदेशी घटनाओं का प्रभाव:-क्रीमिया तथा जापान के साथ युद्ध के रूस के हारने से जनता का असंतोष होना
(viii) रूस का पराजय- प्रथम विश्वयुद्ध में रूस का पराजय होने से लोगों का आक्रोशित होना ।

प्रश्न-2 नई आर्थिक नीति क्या है?
उत्तर: लेनिन द्वारा नई आर्थिक नीति की घोषणा 1921 इं 0 में किया गया था । जिसमें निम्नलिखित मुख्य बातें शामिल है ।
(i) किसानों से अनाज लेने के स्थान पर एक निश्चित कर(टैक्स) लगाया गया ।
(ii)20 से कम कर्मचारियों वाले उद्योगों को व्यक्तिगत रूप से चलाने का अधिकार मिल गया ।

(iii) यह सिद्धांत जारी रखा गया कि जमीन राज्य की है फिर भी इसे किसान ही प्रयोग में लाएगा 
(iv) उद्योगों का विकेंद्रीकरण कर दिया गया । निर्णय तथा क्रियान्वयन के बारे में विभिन्न इकाइयों को काफी छूट दी गई ।
(v) विदेशी पूंजी भी सीमित तौर पर आमंत्रित की गई ।
(vi) व्यक्तिगत संपत्ति और जीवन बीमा भी राजकीय एजेंसी द्वारा शुरू किया गया ।
(vii) विभिन्न स्तर पर बैंक खोले गए ।
(viii) ट्रेड यूनियन की अनिवार्य सदस्यता समाप्त कर दी गई

प्रश्न- 3 रूसी क्रांति के प्रभावों की विवेचना करें ।
उत्तर:- रूसी क्रांति के प्रभाव:-
(I) रूसी क्रांति के बाद श्रमिक एवं सर्वहारा वर्ग की सत्ता रूस में स्थापित हो गई तथा इसने अन्य क्षेत्रों में भी आंदोलन को प्रोत्साहन दिया ।
(ii) विश्व दो विचारधाराओं में विभाजित हो गया: साम्यवादी विश्व एवं पूँजीवाद विश्व । यूरोप भी दो क्षेत्रों में विभाजित हो गया:- पूर्वी यूरोप, पश्चिमी यूरोप ।
(iii) पूँजीवादी विश्व और सोवियत रूस के बीच शीत युद्ध की शुरुआत हुई । जिससे दोनों वर्गों में शास्त्रों को बनाने का होर चलती रही ।

(iv) एक नवीन आर्थिक मॉडल विश्व के सामने आया । इस मॉडल को परिवर्तित कर पूंजीवादी देशों ने भी अपना लिया ।
(v) इस क्रांति की सफलता ने एशिया और अफ्रीका देशों को उपनिवेश से छुटकारा पाने के लिए भी प्रोत्साहन दिया ।

प्रश्न-4 कार्ल मार्क्स की जीवनी एवं सिद्धांतों का वर्णन करें ।
उत्तर:- कार्ल मार्क्स का जन्म 5 मई 1818 को हुआ था । इनका जन्म जर्मनी में राइन प्रांत के ट्रियर नगर में एक यहूदी परिवार में हुआ था । कार्ल मार्क्स ने बोन विश्वविद्यालय में विधि की शिक्षा ग्रहण किया लेकिन आगे पढ़ने के लिए वे बर्लिन विश्वविद्यालय चले गए । उन्होंने अपने बचपन की मित्र”जेनी”से विवाह किया । मार्क्स ने एंजेल्स के साथ मिलकर 1848 ई 0 में एक साम्यवादी घोषणा पत्र को प्रकाशित किया जिसे आधुनिक समाजवादी का जनक कहा जाता है । उन्होंने 1867 ई 0 में “दास कैपिटल”नामक पुस्तक को लिखा जिसे समाजवादियों की बाईबिल भी कहा जाता है ।
             कार्ल मार्क्स के सिद्धांत
(i) द्वंद्वात्मक भौतिकवाद का सिद्धांत ।
(ii) वर्ग संघर्ष का सिद्धांत ।
(iii) इतिहास की भौतिकवादी व्याख्या ।
(iv) मूल्य एवं अतिरिक्त मूल्य का सिद्धांत
(v) राज्यहीन एवं वर्गहीन समाज की स्थापना


प्रश्न-5 यूटोपियन समाजवादियों के विचारों का वर्णन करें ।
उत्तर: यूटोपियन(स्वप्नदर्शी) समाजवादी आदर्शवादी थे । प्रथम फ्रांसीसी यूटोपियन समाजवादी विचारक सेंट साइमन का मानना था कि राज्य एवं समाज को इस ढंग से संगठित करना चाहिए कि लोग एक दूसरे का शोषण करने के बदले मिलजुल कर प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करें  समाज को निर्धन वर्ग के उत्थान के लिए काम करना चाहिए । इसने नारा दिया- प्रत्येक को उनकी क्षमता के अनुसार तथा प्रत्येक को उसके कार्य के अनुसार । एक अन्य महत्वपूर्ण यूटोपियन समाजवादी विचारक चार्ल्स फौरियर आधुनिक औद्योगिकवाद का तिरोधी था । इन्डक्का मानना था कि श्रमिकों को छोटे नगर तथा कस्बों में काम करना चाहिए ।

एक अन्य यूटोपियन समाजवादी लुई ब्लां था । उसका मानना था कि आर्थिक सुधार को प्रभावशाली बनाने के लिए पहले राजनीतिक सुधार आवश्यक हैं ।

Leave a Comment

error: Content is protected !!