हमारी वित्तीय संस्थाएं का सब्जेक्टिव क्वेश्चन आंसर ( Hamari vitteey Sansthaen ka Ithaas Subjective Question Answer )

हमारी वित्तीय संस्थाएं 

दोस्तों मैट्रिक परीक्षा 2023 का तैयारी करना चाहते है तो यहाँ पर (Social Science) सामाजिक विज्ञान का क्वेश्चन आंसर दिया गया है जिसमें अर्थशास्त्र (Economics) का हमारी वित्तीय संस्थाएं का सब्जेक्टिव क्वेश्चन आंसर ( Hamari vitteey Sansthaen ka Ithaas Subjective Question Answer ) दिया गया है तथा सामाजिक विज्ञान का मॉडल पेपर ( Social Science Model Paper 2023 ) भी दिया गया है और आपको सोशल साइंस का ऑब्जेक्टिव क्वेश्चन आंसर हमारी वित्तीय संस्थाएं ऑब्जेक्टिव क्वेश्चन आंसर ( Hamari vitteey Sansthaen ka Ithaas Objective Question Answer ) आपको इस वेबसाइट पर आसानी से मिल जाएगा।

 हमारी वित्तीय संस्थाएं

⇔मुंबई के जिस जगह पर इस पूंजी बाजार का प्रधान क्षेत्र है उसे दलाल स्ट्रीट कहा जाता है।
बिहार की 87% जनसंख्या गांव में निवास करती है |
बिहार के 75% लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कृषि पर निर्भर हैं।
 वित्तीय संस्थाएं दो प्रकार की होती है..
(i) गैर संस्थागत
(ii) संस्थागत
⇔४ महाजन, सेठ साहूकार, व्यापारी, रिश्तेदार एवं अन्य गैर संस्थागत वित्त के उदाहरण
● सहकारी बैंक, व्यावसायिक बैंक, भूमि विकास बैंक इत्यादि संस्थागत वित्त के साधन है।
⇔ग्रामीण लोग 48% ऋण गैर-संस्थागत संस्था से लेते हैं।
गैर-संस्थागत वित्त प्रदान करने वाला सबसे लोकप्रिय साधन महाजन है
राज्य में 25 केंद्र सहकारी बैंक हैं |
बिहार में 6842 प्राथमिक सहकारी कृषि साख समितियां
कार्यरत है |

देश का केंद्रीय बैंक रिजर्व बैंक ऑफ India
सूक्ष्म वित्त संस्थाओं के विकास में बांग्लादेश के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित
⇔प्रोफेसर युनुस का अधिकांश योगदान है |
⇔४ वित्तीय संस्थाएं दो प्रकार की होती है ।
(i) राष्ट्रीय वित्त संस्थाएं
(ii) राज्य स्तरीय वित्त संस्थाएं
निजी बैंक के आगे Ltd लगा रहता है।
⇔४ वाणिज द्वारा बैंकिंग एवं वित्त क्रियाओं का संचालन होता है।
⇔संस्थाएं किसी भी देश का मेरुदंड मानी जाती है
भारत की वित्तीय राजधानी मुंबई में एक सु-संगठित पूंजी बाजार है।
~ भूमि विकास बैंक दीर्घकालीन ऋण (15 से 20 ) के लिए प्रदान करती है ।
व्यवसायिक बैंकों का राष्ट्रीयकरण 1959 में हु
देश में 196 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंककार्यरत
~ क्षेत्र ग्रामीण बैंक की स्थापना 1974 में हुई थी ।
⇔• व्यवसायिक बैंक चार प्रकार के जमा राशि को स्वीकार करते हैं।
(i) स्थाई जमा
(iv) आवर्ती जमा
⇔14 में सहकारिता साख समिति का विधान पारित हुआ।
कम से कम 20 व्यक्ति मिलकर सहकारी साख की स्थापना कर सकते हैं।
⇔1914 में मंगलेन समिति नियुक्त हुई।
⇔सहकारिता प्रांतीय सरकारों का हस्तांतरित विषय 1919 में बनी।
● वर्ष 1929 में महान आर्थिक मंदी आयी थी।
 रिजर्व बैंक की स्थापना 1 अप्रेल 1935 में हुई थी |
स्वयं सहायता समूह में 15 से 20 व्यक्तियों या महिलाएं होती है।
राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक की शुरुआत 1990 के दशक में हुई थी।
⇔ग्रामीण क्षेत्र में साहूकार द्वारा प्राप्त ऋण की प्रतिशत मात्रा 30% है।
भारतीय पूंजी बाजार दीर्घकालीन वित्त प्रदान करती है।


लघु उत्तरीय प्रश्न 


Q.1 वित्तीय संसथान  से आप क्या समझते हैं?
उत्तर- हमारे देश की वह संस्थाएं जो व्यवसाय करने के लिए ऋण प्रदान करती है वित्तिय संस्थाएं कहलाती है। जैसे-स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया इत्यादि


प्रश्न-2 राज्य की वित्तीय संस्थान को कितने भागों में बांटा
जाता है? संक्षिप्त वर्णन करें ।
उत्तर- राज्य के वित्तीय संस्थानों को दो वर्गों में बांटा गया है ।
(i) गैर-संस्थागत- इसके अंतर्गत महाजन, सेठ-साहूकार,
व्यापारी, रिश्तेदार एवं अन्य लोग आते हैं । ऐसे लोग अथवा
… संस्थान अधिक ब्याज दर पर ऋण देते है ।


(ii) संस्थागत- इसके अंतर्गत सहकारी बैंक, क्षेत्रीय बैंक,
भूमि विकास बैंक आदि आते हैं । ऐसे संस्थान कम ब्याज दर
पर ऋण देती हैं?


Q.3  किसान को साख  अथवा ऋण की आवश्यकता क्यों होती है ?
उत्तर-किसान  की फसल बोने एवं खेती से संबंधित आवश्यक उपकरणों को लिए ऋण की आवश्यकता होती है


प्रश्न-4  व्यवसायिक बैंक कितने प्रकार की जमा राशि को
स्वीकार करते हैं? संक्षिप्त विवरण करें ।
उत्तर- व्यवसायिक बैंक निम्नलिखित चार प्रकार की जमा
राशि स्वीकार करते हैं । SUBSCRIBED
(i) स्थायी जमा(Fixed Deposite)- इस प्रकार के जमा
राशि में एक निश्चित अवधि के लिए राशि जमा करने के बाद
ही इस को किसा जा सकता है ।

(ii) आवर्ती जमा(Recurring Deportes)-इस प्रकार के
जमा राशि में एक निश्चित रकम एक निश्चित अवधि तक
जमा करना होता है ।

(iii) चालू जमा(Current Deposits)- इसके अंतर्गत जब
चाहे इच्छा के अनुसार राशि निकाला अथवा जमा किया जा
सकता है ।
(iv) संचयी जमा(Saving Deposite)- ऐसे जमा राशि
का एक निश्चित रकम से अधिक नहीं निकाला जा सकता
है ।


Q.5  सहकारिता से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर सहकारिता एक ऐसा संगठन है जिसमें सामान्य आर्थिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए लोग स्वेच्छा पूर्वक मिलजुल कर कार्य करते हैं।


Q.6  स्वयं सहायता समूह से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर यह ग्रामीण क्षेत्र में 15-20 व्यक्तियों का एक ऐसा समूह होता है जो बैंकों से लघु ऋण पारिवारिक जरूरतों को पूरा करते हैं एवं गांव के विकास में अपना योगदान देते हैं।


प्रश्न-7  भारत में सहकारिता की शुरुआत किस प्रकार हुई ।
संक्षिप्त वर्णन करें ।
उत्तर- भारत में सहकारिता की शुरुआत सर्वप्रथम 1904 ईस्वी में एक “सहकारिता साख समिति विधान” पारित होने
के साथ हुई । इसमें सुधार के लिए 1912 ई 0 में एक ओर
अधिनियम बनाया गया । अंततः 1914 ई 0 में”मैक्लेन
समिति”नियुक्तों की गई जिसने भावी रूपरेखा यास्की समिति”नियुक्त की गई जिसने भावी रूपरेखा तैयार की
इसका संचालन अब राज्य सरकारों द्वारा होती है ।


प्रश्न-8  सूक्ष्म वित्त योजना की परिभाषा दे ।
उत्तर- सूक्ष्म वित्त योजना एक ऐसी योजना है जिसके
अंतर्गत छोटे पैमाने पर गरीब, जरुरतमंद लोगों को स्वयं
सेवी संस्था के द्वारा कम से कम ब्याज दर पर साख अथवा
ऋण की व्यवस्था की जाती है । जिससे ऐसे लोग भी
आर्थिक कार्य कर अपना तथा अपने गाँव का विकास कर सके 


दीर्घ उत्तरीय प्रश्न 


प्रश्न-1  राष्ट्रीय वित्तीय संस्थान किसे कहते हैं?इसे कितने भागों बांटा जाता है वर्णन करें ।
उत्तर- ऐसी वित्तीय संस्थाएं जो देश के लिए वित्तीय और साख
नीतियों का निर्धारण एवं निर्देशन करता है तथा राष्ट्रीय स्तर
वित्त प्रबंधन के कार्यों का संपादन करता है तो उसे हम राष्ट्रीय
वित्तीय संस्थान कहते हैं ।
K राष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों  को निम्नलिखित दो वर्गों व में बांटा गया है । 

(i) मुद्रा बाजार की वित्तीय संस्थान- ऐसा मौद्रिक बाजार जहाँ
उद्योग एवं व्यवसाय के लिए अल्पकालीन या मध्यकालीन
वित्तीय व्यवस्था एवं प्रबंधन किया जाता हैं उसे मुद्रा बाजार
कहते हैं । भारतीय मुद्रा बाजार को संगठित और असंगठित
क्षेत्रों में विभाजित किया गया है ।
(ii) पूँजी बाजार की वित्तीय संस्थान- ऐसा मौद्रिक बाजार जहाँ उद्योग एवं व्यवसाय के लिए दीर्घकालीन वित्तीय व्यवस्था एवं
प्रबंधन किया जाता है उसे पूँजी बाजार कहते है । 5 seconds लीन
पूँजी की माँग बड़े-बड़े उद्योग घराने एवं सार्वजनिक निर्माण
कार्यों के लिए होता है ।


प्रश्न-2 राज्य स्तरीय संस्थागत वित्तीय स्रोत के कार्यों का वर्णन करें?
उत्तर- राज्य स्तरीय संस्थागत वित्तीय स्रोत एवं उनके कार्य
निम्नलिखित हैं ।
(i) सहकारी बैंक- इसके माध्यम से किसानों को अल्पकालीन,
मध्यकालीन एवं दीर्घकालीन ऋण की सुविधा उपलब्ध कराई
जाती है ।

(ii) प्राथमिक सहकारी समितियाँ- यह उत्पादन कार्यों के लिए
अल्पकालीन ऋण एक वर्ष के लिए) देती है परंतु विशेष
परिस्थिति में इसकी अवधि 3 वर्ष तक के लिए बढ़ाई जा
सकती है ।
(iii) भूमि विकास बैंक- यह किसानों की भूमि को बंधक
रखकर कृषि में स्थाई सुधार एवं विकास के लिए दीर्घकालीन
ऋण प्रदान करता है?

(iv) व्यावसायिक बैंक- ऐसे बैंकों के द्वारा भी किसानों को ऋण
प्रदान किया जाता है ।
(v) क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक- ऐसे बैंक सीमांत एवं छोटे किसानों,
कारीगरों तथा अन्य कमजोर वर्ग के जरूरतों को पूरा करने के
उद्देश्य से ऋण प्रदान करता है ।

(vi) नाबार्ड(NABARD)- नाबार्ड शीर्ष संस्थान है जो वित्तीय
संस्थानों, व्यावसायिक बैंकों तथा क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को वित्त
की सुविधा प्रदान करती है और पुनः यह सुविधा इनके द्वारा
किसानों को प्रदान किया जाता है ।


प्रश्न-3 व्यावसायिक बैंक के प्रमुख कार्यों की विवेचना करें 
उत्तर- व्यावसायिक बैंक के प्रमुख कार्य निम्नलिखित है ।
(i) जमा राशि को स्वीकार करना-व्यावसायिक बैंकों का सबसे
महत्वपूर्ण कार्य अपने ग्राहकों से जमा के रूप में राशि को
स्वीकार करना होता है ।
(ii) ऋण प्रदान करना- जमा राशि का एक निश्चित रकम नगद
कोष में रखकर बाकी राशि को बैंक द्वारा co अपने ग्राहकों को ऋण के रूप में प्रदान किया जाता है ।
(iii) सामान्य उपयोगिता संबंधी कार्य- बैंकों के इस प्रकार के
कार्यों के अंतर्गत एटीएम कार्ड तथा चेक की सुविधाएँ प्रदान
करना, सूचनाएं एवं आंकड़ों का एकत्रित करना आदि है ।
(iv)एजेंसी संबंधी कार्य- बैंक ग्राहकों को एजेंसी के रूप में
सेवा प्रदान करती है । इसके अंतर्गत चेक,बिल आदिका संग्रह करना है ।


प्रश्न-4 सहकारिता के मूल तत्व क्या है?राज्य के विकास में
इसकी भूमिका का वर्णन करें ।
उत्तर- सहकारिता के तीन मूल तत्व निम्लिखित है
(i) संगठन की सदस्यता स्वैच्छिक होती है ।
(ii) इसका प्रबंधन एवं संचालन जनतांत्रिक आधार पर
होती है । इनके सदस्यों के बीच पूँजी, हैसियत अथवा किसी अन्य आधार पर कोई भेदभाव नहीं होता है ।
(iii) इनके आर्थिक उद्देश्यों में नैतिक और सामाजिक तत्व
भी शामिल रहते हैं ।
K राज्य के विकास  में सहकारिता को भी बहाम्में 

राज्य के विकास में सहकारिता की भूमिका:- बिहार में
खासकर ग्रामीण स्तर पर अगरबत्ती निर्माण, बीड़ी निर्माण,
जूता निर्माण आदि महत्वपूर्ण रोजगार सहकारिता के
सहयोग से चलाई जा रही है, जिससे लोगों का आय बढ़ रहा है और बिहार के लोगों का जीवन स्तर बेहतर हो रहा है ।
ऐसे रोजगार के लिए राज्य स्तरीय सहकारी बैंक ऋण
उपलब्ध कराती है । अतः राज्य के विकास में सहकारिता की
भूमिका काफी महत्वपूर्ण है ।


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