Ati Shudho Saneh ko Maarag hai Objective Question Answer

Ati Shudho Saneh ko Maarag hai

दोस्तों आपको इस पेज में क्लास 10th हिंदी गोधूलि भाग 2 का पद खांड का चैप्टर 3 अति शुधो सनेह को मारग है का ऑब्जेक्टिव क्वेश्चन आंसर दिया गया है तथा अति शुधो सनेह को मारग है का मॉडल पेपर भी यहां वेबसाइट पर आपको मिल जाएगा || कक्षा 10 हिंदी (गोधूलि भाग 2 काव्य खण्ड) पाठ -3 अति सूधो सनेह को मारग है Subjective Question 2023 || Ati sudho sneh ko maarg hai Subjective Question Answer 2023

3. अति सूधो स्नेह को मार्ग है
कवि परिचय
> इस पाठ के कवि घनानंद का जन्म 1689 ई० में हुआ था
→ घनानंद रीतियुगीन, रीतिमुक्त एवं मधुर भाषा के कवि थे |
→ उनकी हत्या नादिरशाह के सैनिकों ने की थी।
> आप की प्रमुख रचनाएं – सुजानसागर, बिरहलीला, रसकेली बल्ली इत्यादि
→ ये छंद उनकी रचनावली घनऑनंद से लिया गया था ।
→ घनानद ‘प्रेम की पीर ‘के कवि हैं ।
→ घनानंदन की भाषा परिष्कृत और शुद्ध ब्रजभाषा है।


1 – कवि प्रेम मार्ग को अति सूधो क्यों कहता है ? इस मार्ग की विशेषता क्या है
उत्तर – कवि घनानंद ने प्रेम मार्ग को अति सूधो अर्थात अत्यंत सरल कहा है क्योंकि इस मार्ग में कोई चतुराई नहीं चलती है। इस मार्ग की विशेषता यह है कि इस मार्ग पर बिना झुके और बिना छल कपट के चलना होता है।


2 – मन लेहु पे देहु छटांक नहीं से कवि का क्या अभिप्राय है?
उत्तर- यह पंक्ति घनानंद द्वारा रचित काव्य अति सूधो स्नेह को मार्ग है से लिया गया है। इसbपंक्ति के माध्यम से कवि हमें ऐसे झूठे प्रेम करने वाले लोगों के बारे में बताते हैं। जो लेते तो मन भर है परंतु देते छटाक भर भी नहीं यानि ( थोड़ा सा भी नहीं)


3 – परहित के लिए ही देह कौन धारण करता है ? स्पष्ट कीजिए
उत्तर – कवि घनानंद के अनुसार बादल परहित के लिए देह धारण करता है और सब के ऊपर समान बरसता है


4-कवि कहां अपने आंसुओं को पहुंचाना चाहता है और
उत्तर- कवि घनानंद अपने आंसुओं को सुजान के आंगन तक पहुंचाना चाहते हैं क्योंकि कवि सुजान की विरह वेदना में रो रहे हैं।

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