Bihar Board Class 10 Geography Chapter 2 कृषि – Bihar Board

Bihar Board Class 10 Geography

लघु उत्तरीय प्रश्न 

प्रश्न-1.. भारत की सबसे प्रमुख रोपण फसल कौन-सी है ?
उत्तर – चाय, कहवा, रबड़ आदि ।


प्रश्न-2.. फसल चक्रण, मृदा संरक्षण में किस प्रकार सहायक है?
उत्तर- फसल चक्रण द्वारा मृदा के पोषणीय स्तर को बरकरार रखा जा सकता है। गेहूँ, कपास, मक्का, आलू आदि को लगातार उगाने से मृदा में ह्रास उत्पन्न होता इसे तिलहन, दलहन पौधे की खेती के द्वारा पुनर्प्राप्ति किया जा सकता है। इससे नायट्रोजन का स्तरीकरण होता है 


प्रश्न-3..रबी फसलें क्या हैं ? चार उदाहरण दें। है
उत्तर—रबी फसलें को शीत ऋतु में अक्टूबर से दिसम्बर के मध्य बोया जाता तथा ग्रीष्म ऋतु में अप्रैल से जून के मध्य काटा जाता है।
(i) गेहूँ, (ii) जौ, (iii) चना तथा (iv) मटर ।


प्रश्न-4..कहवा उत्पादन प्रमुख राज्य कौन है ?
उत्तर—भारत में कॉफी दक्षिण भारत में उगाया जाता है। कर्नाटक भारत का सबसे बड़ा उत्पाद राज्य है, यहाँ चाय का 20% काफी उत्पादन किया जाता है, इसके अलावे इसका उत्पादन तमिलनाडु, केरल में भी होता है ।


प्रश्न-5. वाणिज्यिक अथवा व्यापरिक कृषि के मुख्य लक्षण क्या हैं ?
उत्तर- वाणिज्यिक अथवा व्यापारिक कृषि के मुख्य लक्षण हैं, उच्च पैदावार
 प्राप्त करने के लिए निम्न निवेशों का प्रयोग-
(i) अधिक पैदावार देनेवाले बीज,
(ii) बड़ी मात्रा में रासायनिक उर्वरक,
(iii) कीटनाशक इत्यादि।


प्रश्न-6. गहन जीवन कृषि क्या है ?
उत्तर- गहन कृषि उन क्षेत्रों में पायी जाती है जहाँ जनसंख्या के अनुपात की भूमि कम होती है। अधिक पूँजी तथा श्रम लगाकर अधिकतम उत्पादन किया जाता है।


प्रश्न-7.भारतीय कृषि विदेशी मुद्रा प्राप्त करने का एक महत्त्वपूर्ण स्त्रोत है। कैसे ?
उत्तर–चाय, कॉफी, मसाले आदि कृषि उत्पादों का निर्यात कया जाता है। इससे भारत को बहुमूल्य विदेशी मुद्रा प्राप्त होती है।


प्रश्न-8.भारत की महत्त्वपूर्ण रोपण फसलों के नाम बताएँ|
उत्तर-भारत की महत्त्वपूर्ण रोपण फसलें चाय, कॉफी, रबड़, गन्ना, केला आदि हैं। चाय असम तथा उत्तरी बंगाल की तथा कॉफी कर्नाटक की मुख्य रोपण फसलें हैं।


दीर्घ उत्तरीय प्रश्न 

प्रश्न-1. भारतीय कृषि की पाँच प्रमुख विशेषताओं को लिखिए।
उत्तर- भारतीय कृषि की पाँच प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं
(i)भारतीय कृषि आर्थिक जीवन का प्राण है। भारत में लगभग 2/3 लोगों की जीविका कृषि पर आधारित है।
(ii)यहाँ की विशाल जनसंख्या के लिए भोजन कृषि से ही प्राप्त होता है।
यहाँ की कृषि से कच्चे माल उद्योगों को प्राप्त होते हैं। जैसे-कपाससे सूती वस्त्र उद्योगों, गन्ना से चीनी उद्योग, जूट से जूट उद्योग एवं अन्य
कृषि उत्पाद कृषि प्रसंस्करण उद्योगों को कच्चा माल देते हैं। जैसे-रसदार
फल जैली जैम, स्वतंत्र उत्पादन के लिए आधार प्रदान करते हैं । इस
तरह की कृषि उद्योगों की मजबूती प्रदान करता
है
(iv) यहाँ की जलवायु मिट्टी एवं धरातल की विविधता के कारण भारत में
फसलों की विविधता भी पायी जाती है। चाय, गन्ना, मोटे अनाज एवं
कुछ तिलहनों के उत्पादन का विश्व में अग्रणी स्थ


प्रश्न-2.भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि का क्या महत्व है?
उत्तर – भारतीय अर्थतंत्र में कृषि का निम्नलिखित महत्त्व
(i) भारत की 70% आबादी रोजगार और आजीविका के लिए कृषि पर आश्रित है।
(ii) देश के सकल राष्ट्रीय उत्पाद में कृषि का योगदान 22% ही है। फिर भी, बहुत सारे उद्योगों को कच्चा माल कृषि उत्पाद से ही मिलता है।
(iii) कृषि उत्पाद से ही देश की इतनी बड़ी जनसंख्या को खाद्यान्न की आपूर्ति होती है। अगर ऐसा न हो तो खाद्यान्न आयात करना पड़ेगा।
(iv) कृषि के अनेक उत्पादों में भारत विश्व में पहले, दूसरे एवं तीसरे स्थान पर है।
(v) अनेक कृषि उत्पादों का भारत निर्यातक है जिससे विदेशी मुद्रा की प्राप्ति होती है।
(vi) कृषि ने अनेक उद्योगों को विकसित होने का अवसर प्रदान किया है।


 प्रश्न-3.हरित क्रांति से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर- 1960-70 के दशक में कृषि में सुधार के अंतर्गत एक पैकेज लायी गयी। जिसमें गेहूँ में कृषि में हरित क्रांति की शुरूआत हुई। इसके अंतर्गत संकर किश्म का उन्नत बीज रासायनिक खाद, सिंचाई, कीटनाशक आदि का उत्पादक प्रयोग कर खाद्य उत्पादन में अप्रत्याशित वृद्धि की गई है तथा खाद्य सुरक्षा में यह मील का पत्थर साबित हुयी है। इस क्रांति को आगे बढ़ने में सहकारिता विभाग पर भारत सरकार ने काफी ध्यान दिया । हरित क्रांति से फसलों के पैदावार में काफी वृद्धि हो गयी, इससे साधन उत्पादन में भारत आत्मनिर्भर हो गया है ।


प्रश्न-4. भारतीय कृषि की निम्न उत्पादकता के कारणों को संक्षेप में लिखिए ।
उत्तर- भारतीय कृषि की निम्न उत्पादकता के कई कारण हैं, जिनमें
(i) जनसंख्या का कृषि भूमि पर निरंतर बढ़ता दबाव ।
(ii) घटता कृषि भूमि क्षेत्र ।
(iii) खेतों का छोटा आकार ।
(iv) भू-स्वामित्व प्रणाली ।
(v) सिंचाई कम और अनिश्चित सुविधाएँ ।
(vi) मानसूनी वर्षा की अनिश्चितता ।
(vii) कृषि योग्य भूमि का निम्नीकरण ।
(viii) कम पूँजी निवेश ।
(ix) आधुनिक कृषि तकनीक, कीटनाशक, रासायनिक खाद आधुनिक यंत्र का सीमित उपयोग ।
(x) कृषि में वाणिज्यीकरण का अभाव ।


प्रश्न-5.चावल की फसल के लिए उपयुक्त भौगोलिक दशाओं का उल्लेख करें ।
उत्तर-बिहार में धान की फसल खरीफ फसल के अंतर्गत आती है। यहाँ तीन उपजें भदई, अगहनी तथा गरमा होती है। यह राज्य के लगभग सभी क्षेत्रों में उत्पन्न की जाती है। बिहार की मैदानी भाग अधिक उपयुक्त है, क्योंकि जलोढ़ मिट्टी काफी उपजाऊ है, यह फसल जून-जुलाई में लगाई जाती है । यह उष्णार्द्र जलवायु की फसल है। इसके लिए 20°-27° सेल्सियस तापमान 75-200 cm. वर्षा एवं अधिक श्रमिक चाहिए।


 

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