बिहार कृषि एवं वन संसाधन Bihar Krishi Ewang Wan Sansadhan subjective 2023

    Bihar Krishi Ewang Wan Sansadhan subjective

        लघु उत्तरीय प्रश्न 

 प्रश्न 1. बिहार की मुख्य फसलें क्या हैं ?
उत्तर-बिहार की प्रमुख फसलों में धान, गेहूँ, मकई, गन्ना, तम्बाकू, महुआ, ज्वार, दलहन और तिलहन हैं।


प्रश्न 2. बिहार में जूट का उत्पादन किन-किन जिलों में होता है ?
उत्तर–पूर्णिया, कटिहार, मधेपुरा, किशनगंज, सहरसा, दरभंगा और समस्तीपुर जिलों में जूट का उत्पादन मुख्य रूप से होता है।


प्रश्न 3. दुर्गावती जलाशय परियोजना का मुख्य उद्देश्य क्या है ?
उत्तर—इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य कैमूर एवं रोहतास जिले के सूखाग्रस्त क्षेत्रों की सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण है।


 प्रश्न 4. बिहार में ऐसे जिलों का नाम लिखिए जहाँ वन विस्तार एक प्रतिशत से भी कम है।
उत्तर-बिहार राज्य में वन क्षेत्र का प्रतिशत है पटना (0.75%), जहानाबाद (0.10%), पूर्वी चम्पारण (0.01%) पूर्णिया (0.02%), किशनगंज (0.06%), अररिया (0.13%), कटिहार (0.29% ) वनों का विस्तार है ।


प्रश्न 5. नदी घाटी परियोजनाओं के मुख्य उद्देश्यों को लिखें ।
उत्तर-आपार जल संसाधन के उपयोग के लिए बाढ़ की विभीषिका, सूखे की प्रचण्डता को देखते हुए बिहार में नदी घाटी योजनाओं का विकास किया गया है। जिससे जल विद्युत, उत्पादन सिंचाई मछली पालन, पेयजल, औद्योगिक उपयोग मनोरंजन एवं यातायात का विकास मुख्य उद्देश्य है ।


प्रश्न 6. बिहार में स्थित राष्ट्रीय उद्यान एवं अभ्यारण्यों की संख्या बताएँ और दो अभ्यारण्यों की चर्चा करें ।
उत्तर- बिहार राज्य में 14 अभ्यारण्य एवं एक राष्ट्रीय उद्यान है । गौतम बुद्ध अभ्यारण्य (गया) में है। दरभंगा जिला में कुशेश्वर स्थान पर वन्य जीवों अभ्यारण थे वन्य जीवों के संरक्षण के लिए प्रसिद्ध है। कुशेश्वर में पहले बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षियों को फंसाया जाता था लेकिन जन जागरण के कारण अब यहाँ पर किसी भी प्रकार शिकार करना पूर्णतः वर्जित हो गया है।


                         दीर्घ उत्तरीय प्रश्न 

प्रश्न 1. बिहार में वनों के अभाव के चार कारणों को लिखिए
उत्तर-बिहार में वनों के अभाव के निम्नलिखित कारण हैं
(i) बिहार विभाजन के बाद अधिकतर वनाच्छादित क्षेत्र झारखण्ड में चला गया है। वर्तमान बिहार में 6.87% भौगोलिक क्षेत्र में ही वन है।
(ii) बिहार में गंगा का उत्तरी मैदान बहुत ही उपजाऊ है। अतः यहाँ के लोग वन लगाने की अपेक्षा कृषि कार्य करना ही सर्वोत्तम मानते हैं।
(iii) वनों की अंधाधुंध कटाई के कारण भी यहाँ वनों का अभाव है।
(iv) सबसे महत्त्वपूर्ण कारण यह है कि लोगों में वनों के महत्त्व से संबंधित जागरूकता नहीं है। इन कारणों से बिहार में वनों का तेती है ह्रास हो रहा है।


प्रश्न 2. बिहार में वन सम्पदा की वर्त्तमान स्थिति का वर्णन कीजिए।
उत्तर- बिहार विभाजन के बाद बिहार में वनों की स्थिति दयनीय हो गई है। वर्त्तमन में अधिकतर भूमि कृषि योग्य हैं। बिहार में 764.47 हेक्टेयर में ही वन क्षेत्र बच गया है, जो बिहार के भौगोलिक क्षेत्र का लगभग 6.87% है। यहाँ प्रति व्यक्ति वन भूमि क औसत मात्र 0.05 हेक्टेयर है जे राष्ट्रीय औसत 0.53 हेक्टेयर से बहुत ही कम है। बिहार के 38 जिलों में से 17 जिलों से वन क्षेत्र समाप्त हो गया है। पश्चिमी चम्पारण, मुंगेर, बांका, जमुई, नवादा, नालन्दा, गया, रोहतास, कैमूर और औरंगाबाद जिलों के वनों की स्थिति कुछ बेहतर हैं, जिसक कुल क्षेत्रफल 3700 वर्ग किलोमीटर है। शेष में अवक्रमित वन क्षेत्र हैं, जहाँ वन के नाम पर केवल झुरमुट बच गये हैं। सिवान, सारण, भोजपुर, बक्सर, पटना, गोपालगंज, वैशाली, मुजफ्फरपुर, मोतिहारी, दरभंगा…


प्रश्न 3. बिहार में नहरों के विकास से संबंधित समस्याओं को लिखिए ।
उत्तर- बिहार में जल संसाधन का उपयोग मुख्य रूप से सिंचाई, गृह एवं औद्योगिक संस्थानों में होता है। बिहार में सिंचाई के लिए नहर प्रमुख साधन हैं। यहाँ वर्तमान में 95% से अधिक जल संसधन का उपयोग सिंचाई में होता है। इसके अलावा अनियमित एवं असमान वर्षा भी होती हैं। यहाँ कुछ फसलें शीत हैं और यह मौसम शुष्क रहता है। यहाँ मैदानी भागों में नहरों का विकास अधिक में होती ऋतु हुआ है, क्योंकि यहाँ पर समतल भूमि, मुलायम मिट्टी, विस्तृत कृषि क्षेत्र तथा सतत्वाहिनी नदियों द्वारा जल की आपूर्ति होती है। उत्तरी बिहार की अधिकतर नदियाँ हिमालय से निकलने के कारण सततवाहिनी हैं। यहाँ की नहरों में वर्ष भर पानी रहताहै, इसके विपरीत दक्षिण गंगा के मैदान कर नहरें छोटानागपुर पठार से निकलने केकरण बरसाती हैं।


प्रश्न 4. बिहार में बाढ़ की स्थिति का वर्णन करें ।
उत्तर-मौनसून की अनिश्चितता के कारण बिहार के किसी-न-किसी भाग में प्रतिवर्ष बाढ़ का आगमन होता है। बिहार की कोसी बाढ़ की विभीषिका के लिए बदनाम है। उत्तरी बिहार के मैदान बाढ़ से अधिक प्रभावित हैं। उत्तरी बिहार में बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में सारण, गोपालगंज, वैशाली, सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर, सहरसा, खगड़िया, दरभंगा, मधुबनी इत्यादि हैं। इन क्षेत्रों में मुख्यत: घाघरा, गंडक, कमला, बागमती और कोसी नदियों से बाढ़ आती है। उत्तरी बिहार की नदियों में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होने के प्रमुख कारण हिमालय तराई क्षेत्र में अधिक वर्षा है। एक सर्वेक्षण के अनुसार बिहार में कुल बाढ़-क्षेत्र लगभग 64 लाख हेक्टेयर है।


प्रश्न 5. कृषि बिहार की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं इस कथन की व्याख्या
उत्तर-बिहार एक कृषि प्रधान राज्य है। यहाँ की 80% आबादी कृषि पर निर्भर है। झारखंड के अलग हो जाने के बाद बिहार के लोगों के लिए कृषि का महत्वं बढ़ रहा है। 2005-06 से 59.37% भूमि पर कृषि की जाती है। बिहार में धान, गेहूँ, मकई, जौ, गन्ना, तम्बाकू, ज्वार, तेलहन, दलहन फसले होती है यहाँ सकल घरेलू उत्पादन में कृषि का योगदान सर्वाधिक है इसलिए कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़ है


प्रश्न 6. बिहार में दलहन के उत्पादन एवं वितरण का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत कीजिए
उत्तर-बिहार के दलहन फसलों में चना, समूर, खेसारी, मटर, रबी दलहन की फसलें हैं, जबकि अरहर और मूँग खरीफ दलहन की फसलें हैं। 2006-07 ई० में बिहार में रबी दलहन की खेती 519.6 हजार हेक्टेयर भूमि में की गई तथा खरीफ दलहन की खेती 87.26 हजार हेक्टेयर क्षेत्र के किया गया। दलहन उत्पादन में पटना जिला का स्थान बिहार में सबसे आगे है, जबकि औरंगाबाद और कैमूल जिले क्रमशःदूसरे और तीसरे स्थान पर है।


 

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