बिहार कृषि मानचित्र अध्ययन (उच्चावच निरूपण) Bihar Krishi Manchitra adhdhyan Subjective

Bihar Krishi Manchitra adhdhyan Subjective

लघु और दीर्घ उत्तरीय प्रश्न 

प्रश्न 1. उच्चावच प्रदर्शन की प्रमुख विधियों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर–धरातल पर पायी जाने वाली उच्चावच को प्रदर्शित करने के लिए निम्नलिखित विधियाँ हैं(i) हैश्यूर विधि-इस विधि के अंतर्गत मानचित्र में छोटी महीन एवं खंडित
रेखाएँ खींची जाती हैं। ये रेखाएँ ढाल की दिशा में खींची जाती है। इससे ढाल प्रवणता का सही-सही ज्ञान हो पाता है।
(ii) पर्वतीय छायाकरण-इस विधि से प्रदर्शित उच्चावच ऊपर से लिए गए फोटोग्राफ के समान प्रतीत होता है ।
(iii) तल चिह्न इस विधि द्वारा दीवार, पुलों स्तंभों पर समुद्रतल से मापी गई है । ऊँचाई को प्रदर्शित करने वाले चिह्न को तल चिह्न कहा जाता
(iv) स्थानीय ऊँचाई तल चिह्न की सहायता से किसी स्थान विशेष की मापी गई ऊँचाई को स्थानीक ऊँचाई कहा जाता है।
(v) त्रिकोणमितीय स्टेशन इसका उपयोग त्रिभुजन विधि द्वारा सर्वेक्षण करते समय स्टेशन के रूप में हुआ था।
(vi) स्तर रंजन रंगीन मानचित्र में रंगों की विभिन्न आभाओं के द्वारा अभ्यारण प्रदर्शन का एक मानक निश्चित किया जाता है ।
(vii) समोच्च रेखाएँ- समोच्च रेखाएँ भूतल पर समुद्र तल से एक समान ऊँचाई वाले स्थानों को मिलाकर मानचित्र पर खींची जाने वाली काल्पनिक रेखाएँ हैं।


प्रश्न 2. समोच्च रेखा क्या है ? इसके द्वारा विभिन्न प्रकार के ढालों प्रदर्शन किस प्रकार किया जाता है ?
उत्तर समोच्च रेखाओं की सहायता से उच्चावच प्रदर्शन की विधि को सर्वश्रेष्ठ माना गया है। यह एक मानक विधि है। वस्तुतः समोच्च रेखाएँ भूतल पर समुद्र जल तल से एक समान ऊँचाई वाले बिंदुओं को मिलाकर मानचित्र पर खींची
जाने वाली काल्पनिक रेखाएँ हैं। इन रेखाओं को क्षेत्र में सम्पन्न किए गए वास्तविक सर्वेक्षण के आधार पर खींचा जाता है। मानचित्र में इस सर्वोच्च रेखाओं को बादामी
रंग से दिखाया जाता है । वर्ग औसत कटिहार, एवं जमुई,hai 


 

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