लोकतंत्र की उपलब्धिया Loktantra Ki Uplabdhiya Subjective 2023

Loktantra Ki Uplabdhiya Subjective

       लघु उत्तरीय प्रश्न 

प्रश्न 1. तानाशाही सरकार किसे कहते हैं
उत्तर- एक व्यक्ति अथवा कुछ व्यक्तियों का शासन, जिनके पास देश की संपूर्ण सत्ता होती है। वह सत्ता वह अपने बल से तथा क्रूरतापूर्वक हासिल किया हो ।


प्रश्न 2. वैध सरकार किसे कहते हैं ?
उत्तर-वैध सरकार उस सरकार को कहते हैं जो कानूनी रूप से लोगों के द्वारा चुनी जाती है अथवा दूसरे शब्दों में जनता की सरकार को वैध सरकार कहते हैं ।


प्रश्न 3. लोकतंत्र की सबसे बड़ी विशेषता क्या है ?
उत्तर लोकतंत्र की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ लोगों के बीच नियमित संवाद की गुंजाइश बनी रहती है ।


प्रश्न 4. लोकतंत्र हर मर्ज की दवा है। कैसे ?
उत्तर—यह सही है लोकतंत्र कुछ चीजों को प्राप्त करने की स्थितियाँ तो बना सकता है, परन्तु इन स्थितियों से लाभ उठाना नागरिकों का अपना काम होता है ।


प्रश्न 5. लोकतांत्रिक सरकार में फैसले लेने में विलंब क्यों होता है ?
उत्तर लोकतांत्रिक सरकार में फैसले को विधायिका की लंबी प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है 


प्रश्न 6. प्रत्यक्ष लोकतंत्र कहाँ है, उसके उपकरण कौन-कौन से हैं ?
उत्तर प्रत्यक्ष लोकतंत्र में जनता स्वयं शासन में भाग लेती है। प्रत्यक्ष लोकतंत्र स्विट्जरलैंड में है।


प्रश्न 7. प्रत्यक्ष प्रजातंत्र एवं अप्रत्यक्ष प्रजातंत्र में अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर प्रत्यक्ष प्रजातंत्र में जनता शासन-कार्य में सीधे भाग लेती है। अप्रत्यक्ष प्रजातंत्र शासन का वह रूप है जो जनता के प्रतिनिधियों द्वारा चलाया जाए।


प्रश्न 8. किसी देश का आर्थिक विकास किस पर निर्भर करता है ?
उत्तर- किसी देश का आर्थिक विकास उस देश की जनसंख्या, आर्थिक प्राथमिकताएँ, अन्य देशों के सहयोग के साथ-साथ वैश्विक स्थिति पर भी निर्भर करती है।


प्रश्न 9. क्या लोकतंत्र, स्वतंत्र एवं निष्पक्ष मताधिकार है ?

उत्तर- आज हम भारीतय लोकतंत्र में “स्वतंत्र एवं निष्पक्ष मताधिकार” के करीब हैं। स्वतंत्रता के बाद और आज की इस संदर्भ में तुलतना करें तो स्थिति अपेक्षाकृत काफी बेहतर है


                        दीर्घ उत्तरीय प्रश्न 

प्रश्न-1. लोकतंत्र किस तरह उत्तरदायी एवं वैध सरकार का गठन करता हैं?
उत्तर:- लोकतंत्र एक उत्तरदायी सरकार का गठन करता है क्योंकि सरकार जब कोई गलत कार्य करते है, गलत फैसला लेते है या जनता के समस्याओं का समाधान नहीं करते हैं तो जनता द्वारा इस पर प्रश्न उठाया जाता है यदि सरकार इन प्रश्नों के प्रति उत्तरदायी नहीं सामना होता करना है तो पड़ता एस सरकार है । अतः का प्रत्येक अगले सरकार चुनाव को में हार हार का से बचने के लिए एक उत्तरदायी सरकार का गठन करना आवश्यक हो जाता है । लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता अपना मताधिकार का प्रयोग कर सरकार को बहुमत के आधार पर चयन करता है । क्योंकि सरकार का चयन बहुमत के आधार पर जनता द्वारा किया जाता है इसलिए लोकतंत्र वैध सरकार का गठन करता है ।


प्रश्न-2. लोकतंत्र किस प्रकार आर्थिक संवृद्धि एवं विकास में सहायक बनता है?
उत्तर: सन् 1950 से 2000 के बीच आर्थिक संवृद्धि तानाशाही शासन व्यवस्था में अधिक एवं
लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था में धीमी देखा गया है । लेकिन लोकतंत्र में आर्थिक संवृद्धि धीमी होने के कारण लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था को कम आंकना सही नहीं है । दुनिया के कई लोकतांत्रिक सरकार आर्थिक शक्ति के रूप में उभर रहा है जैसे- संयुक्त राज्य अमेरिका, भारत आदि । पर ही निर्भर नहीं आर्थिक करती संवृद्धि है यह केवल कई अन्य सरकार कारकों के प्रारूप पर भी निर्भर करता है जैसे- • उस देश की जनसंख्या, वैश्विक स्थिति, अन्य देशों से सहयोग, आर्थिक प्राथमिकता आदि । यदि हम संतोषजनक आर्थिक संवृद्धि के साथ साथ अन्य सकारात्मक पहलू को भी देखते हैं तो हम कह सकते हैं कि लोकतंत्र हमेशा तानाशाह से बेहतर है


प्रश्न-3. लोकतंत्र किन स्थितियों में सामाजिक विषमता को पाटने में मददगार होता है और सामंजस्य के वातावरण का निर्माण करता हैं?
उत्तर:- किसी भी लोकतंत्र में समाज जाति, भाषा रहता एवं क्षेत्र है । यह आदि सभी के आधार समूह आपस पर विभिन्न में मिलकर समूहों एक में बँटा ही हुआ लोकतांत्रिक व्यवस्था में रहते हैं । इन समूहों के बीच कभी-कभी मतभेद या टकराव की स्थिति उत्पन्न हो जाता हैं । इन समूहों के बीच टकराव को खत्म करना असंभव है लेकिन इसे कम किया जा सकता है । लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था में सभी समूहों के विचारों टकराव का सम्मान को किया कम करने जाता का हैं और पूरा प्रयास इन समूहों किया के जाता बीच है के ।इस प्रकार लोकतंत्र में इन समूहों के बीच आपसी टकराव को कम कर सामंजस्य के वातावरण का निर्माण किया जाता है ।


प्रश्न 4. भारतीय लोकतंत्र कितना सफल है ?
उत्तर-आज दुनिया के लगभग 100 देशों में लोकतंत्र किसी-न-किसी रूप में विद्यमान है। लोकतंत्र का लगातार प्रसार एवं उसे मिलनेवाला जनसमर्थन यह साबित करता है कि लोकतंत्र अन्य सभी शासन-व्यवस्थाओं से बेहतर है। इन व्यवस्था में सभी नागरिकों को मिलनेवाला समान अवसर, व्यक्ति की स्वतंत्रता एवं गरिमा आकर्षण के बिन्दु हैं। साथ ही इसमें आपसी विभेदों एवं टकरावों को कम करने और गुण-दोष के आधार पर सुधार की निरंतर संभावनाएँ लोगों को इसके करीब लाती हैं। इस प्रसंग में सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है कि लोकतंत्र में फैसले किसी व्यक्ति विशेष द्वारा नहीं, बल्कि सामूहिक सहमति के आधार पर लिये जाते हैं । लोकतंत्र के प्रति लोगों की उम्मीदों के साथ-साथ शिकायतें भी कम नहीं होती है। लोकतंत्र से लोगों की अपेक्षाएँ इतनी ज्यादा हो जाती है कि इसकी थोड़ी-सी भी कमी खलने लगती है। कभी-कभी तो हम लोकतंत्र को हर मर्ज की दवा मान लेने का भी खतरा मोल लेते हैं और इसे तमाम सामाजिक, राजनैतिक एवं आर्थिक विषमता को समाप्त करनेवाली जादुई व्यवस्था मान लेते हैं। इस तरह का अतिवादी दृष्टिकोण लोगों में इसके प्रति अरुचि एवं उपेक्षा का भाव भी पैदा करता है। परन्तु, लोकतंत्र के प्रति यह नजरिया न तो सिद्धांत रूप में और न ही व्यावहारिक धरातल पर स्वीकार्य है । अतः, लोकतंत्र की उपलब्धियों को जाँचने-परखने से पहले हमें यह समझ बनानी पड़ेगी कि लोकतंत्र अन्य शासन-व्यवस्थाओं से बेहतर एवं जनोन्नमुखी है। अब नागरिकों का दायित्व है कि वे इन स्थितियों से लाभ उठाकर लक्ष्य की प्राप्ति करें ।


 

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