Naubatkhane me Ibadat Subjective Question Answer 2023

Naubatkhane

दोस्तों यहां पर आपको कक्षा दसवीं हिंदी गोधूलि भाग 2 बिहार बोर्ड के लिए नौबतखाने में इबादत पाठ का सब्जेक्टिव प्रश्न दिया गया है। जो मैट्रिक परीक्षा 2023 के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है ।और यहाँ पर Naubatkhane me Ibadat का Objective Question Answer दिया गया है। जिसे आप आसानी से पढ़ सकते है

 लेखक परिचय
इस पाठ के लेखक यतींद्र मिश्र का जन्म 1977 ई० में उत्तर प्रदेश के अयोध्या में हुआ था ।
यतींद्र मिश्र को राजीव गांधी राष्ट्रीय एकता पुरस्कार, रजा पुरस्कार, हेमंत स्मृति कविता
पुरस्कार, ऋतुराज सम्मान मिला है।

 नौबत खाने का अर्थ – “प्रवेश द्वार में बजने वाली मंगल ध्वनि “है।
 इबादत का अर्थ- उपासना है ।
 काशी संस्कृति का केंद्र कहा जाता है ।
 बिस्मिल्लाह खा शहनाई बजाते थे | वह शहनाई के पर्याय भी कहलाते हैं ।
 बिस्मिल्लाह खा को भारत रत्न पुरस्कार से नवाजा गया था ।
⇒ बिस्मिल्लाह खा का जन्म डुमराव (बिहार) में हुआ था ।
 काशी में गंगा, बाबा विश्वनाथ, बालाजी का मंदिर है।
 बिस्मिल्लाह खा मन्नत मांगते थे कि मेरा सुर ठीक रहे ।
इस पाठ में मुहर्रम त्यौहार का जिक्र है ।
 बिस्मिल्ला खां सुशीर वाद्य यंत्र बजाते हैं।
 शहनाई नरकट (एक प्रकार का घास ) से बनाया जाता है ।
 बिस्मिल्लाह खा के परदादा उस्ताद खां हुसैन डुमराव के निवासी थे ।
 मुहर्रम सिया मुसलमान हजरत इमाम हुसैन एवं उनके कुछ वंश जी के प्रति शौक के
लिए मनाते हैं।
⇒ मोहर्रम के दिन बिस्मिल्ला खा शहनाई नहीं बजाते थे।
 काशी में मरना भी मंगल माना जाता है।
 काशी आज भी संगीत के स्वर पर जगती है


1- डुमराव की महत्ता किस कारण से है ?
उत्तर- डुमराव में नरकट नाम का पौधा पाया जाता है जिससे शहनाई बनाई जाती है।
इसीलिए डुमराव की महत्ता अधिक है।


2- सुषिर वाद्य किन्हें कहते हैं । ‘ शहनाई ‘शब्द की उत्पत्ति किस प्रकार हुई है?
उत्तर- शहनाई को सुषिर वाद्य कहा जाता है | इसे मुह से फूक मार कर बजाना पड़ता है
|अरब देशों में शहनाई जैसी वस्तु को नथ कहकर बुलाया जाता है शहनाई को वहां शाहनेय
कह कर बुलाया जाता है। दक्षिण भारत में इसे शहनाई नाम से बुलाया जाता है | इस शब्द
की उत्पत्ति के विषय में कहीं सटीक जानकारी नहीं है।


3 – मुहर्रम पर्व से बिस्मिल्लाह खा के
उत्तर – मुहर्रम से बिस्मिल्लाह खा का जुड़ाव का परिचय पाठ के आधार पर दे । जुड़ाव काफी घनिष्ठता था | मुहरम का मतलब बिस्मिल्ला खा की शहनाई परंतु मोहर्रम के दिन बिस्मिल्ला खा के परिवार में कोई शहनाई नहीं बजाता था।


4 – बिस्मिल्लाह खा जब काशी के बाहर प्रदर्शन करते थे तो क्या करते थे
इससे हमें क्या शिक्षा मिलती है ?
उत्तर-बिस्मिल्ला खा जब काशी से बाहर प्रदर्शन करते थे तब वह काशी की ओर मुंह करके
प्रणाम कर शहनाई बजाते थे। इससे हमें यह सीख मिलती है कि हमें अपनी जन्म और कर्म
भूमि को नहीं भूलना चाहिए।


 

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