सत्ता में साझेदारी की कार्यप्रणाली Satta Me Sajhedari Ki Karypranaali Subjective 2023

Satta Me Sajhedari Ki Karypranaali Subjective

 लघु उत्तरीय प्रश्न 

प्रश्न 1. सत्ता की साझेदारी लोकतंत्र में क्या महत्त्व रखती है
उत्तर-सत्ता की साझेदारी ही लोकतंत्र का मूलमंत्र है। लोकतंत्र में जनता ही सारी शक्तियों का स्रोत एवं उपभोग करनेवाली होती है। लोकतंत्र में समाज के विभिन्न समूहों एवं विचारों को उचित सम्मान दिया जाता है। लोकतंत्र में ही विभिन्नसामाजिक समूहों के हितों एवं जरूरतों का सम्मान कर उनके बीच मतभेद तथा टकरावों को दूर किया जाता है तथा देश प्रगति के पथ पर सदा अग्रसर रहता है।


प्रश्न 2. महापौर पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें।
उत्तर- नगर परिषद् का निर्माण नगर निगम क्षेत्र के विभिन्न वार्ड के कौंसलरों के द्वारा होता है, जिनका कार्यकाल पाँच वर्ष का होता है। इसमें सदस्यों के बीच से एक महापौर तथा एक उपमहापौर का चयन किया जाता है। महापौर नगर का प्रथम नागरिक माना जाता है। महापौर के अनुपस्थिति में नगर परिषद् का कार्य उपमहापौर के द्वारा सम्पन्न किया जाता है।


प्रश्न 3. समवर्ती सूची से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर-हमारे संविधान की सातवीं अनुसूची में केन्द्र व राज्यों के मध्य शक्तियों का विभाजन किया गया है। समवर्ती सूची में उन मामलों को शामिल किया गया है जिन पर कानून बनाने का अधिकार केन्द्र व राज्यों दोनों को प्राप्त है।


 प्रश्न 4 . संघ राज्य का अर्थ बताएँ।
उत्तर-जब सत्ता का विभाजन क्षेत्राधीन स्वायत्तता; केन्द्रीय राज्य या क्षेत्रीय स्तर एवं स्थानीय सरकारों के बीच वितरित कर दी जाती है तो संघीय राज्य कहलाती है किन्तु सर्वोच्च सत्ता केन्द्र के पास होती है।


प्रश्न 5. वार्ड पार्षद के क्या कार्य हैं ?
उत्तर-वार्ड-पार्षद के निम्न कार्य हैं
(i) अपने वार्ड में सफाई की व्यवस्था करना ।
(ii) अपने वार्ड में सड़क, नाली तथा गली बनवाना ।
(iii) जलापूर्त्ति एवं रौशनी की व्यवस्था करना ।


प्रश्न 6. ग्राम पंचायतों के प्रमुख अंग कौन-कौन हैं ?
उत्तर-ग्राम पंचायतों के प्रमुख अंग इस प्रकार अग्रलिखित हैं
(i) ग्राम सभा
(ii) कार्यकारिणी समिति
(iii) पंचायत सेवक
(v) ग्राम कचहरी ।
(iv) ग्राम रक्षा दल


    दीर्घ उत्तरीय प्रश्न 

 प्रश्न 1. पंचायती राज से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर- आज का युग लोकतंत्र का युग है। लोकतंत्र में शासन के विकेंद्रीकरण पर विशेष बल दिया जाता है। भारतीय प्रशासन प्रशासन में भी विकेंद्रीकण के सिद्धांत को
अपनाए जाने की आवश्यकता प्रतीत हुई। इस सिद्धांत को कार्यरूप देने के उद्देश्य से भारत की संघ सरकार ने बलवंतराय मेहता समिति का गठन किया। इस समिति
ने यह सिफारिश की कि भारत में पंचायती राज की स्थापना की जाए। इसके अनुसार ग्राम, प्रखंड एवं जिला स्तर पर स्थानीय संस्थाओं का गठन किया जाए।


प्रश्न 2. सत्ता की साझेदारी के अलग-अलग तरीके क्या हैं
उत्तर- लोकतंत्र में सरकार की सारी शक्ति किसी एक अंग में सीमित नहीं रहती है, बल्कि सरकार के विभिन्न अंगों के बीच सत्ता का बँटवारा होता है। यह बँटवारा सरकार के एक ही स्तर पर होता है। उदाहरण के लिए, सरकार के तीनों अंगों विधायिका, कार्यपालिका एवं न्यायपालिका के बीच सत्ता का बँटवारा होता है और ये सभी अंग एक ही स्तर पर अपनी-अपनी शक्तियों का प्रयोग करके सत्ता में साझेदार बनते हैं। सरकार के एक स्तर पर सत्ता के ऐसे बँटवारे को हम सत्ता का क्षैतिज वितरण कहते हैं । सत्ता में साझेदारी की दूसरी कार्य प्रणाली में सरकार के विभिन्न स्तरों पर सत्ता का बँटवारा होता है। सत्ता के ऐसे बँटवारे को हम सत्ता का ऊर्ध्वाधार वितरण कहते हैं ।


प्रश्न 3. ग्राम रक्षा दल से क्या समझते हैं
उत्तर – ग्राम पंचायत ग्रामीण क्षेत्रों की स्वायत्त संस्थाओं में सबसे नीचे का स्तर ग्राम रक्षा दल है, लेकिन इसका स्थान सबसे अधिक महत्वपूर्ण है। ग्राम पंचायतों के प्रमुख अंग में एक अंग ग्राम रक्षा दल भी है। यह गाँव की पुलिस व्यवस्था है जो 18-30 वर्ष के आयु वाले युवक शामिल हो सकते हैं। सुरक्षा दल का एक नेता भी होता है जिसे दलपति कहते हैं। इसके ऊपर गाँव की रक्षा और शांति का उत्तरदायित्व ह


प्रश्न 4. सत्ता की साझेदारी से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर-सत्ता की साझेदारी एक ऐसी कुशल राजनीतिक पद्धति है जिसके द्वारा समाज के सभी वर्गों को देश की शासन प्रक्रिया में भागीदार बनाया जाता है ताकि कोई भी वर्ग यह महसूस न करें कि उसकी अवहेलना हो रही है। वास्तव में सत्ता की भागीदारी लोकतंत्र का मूलमंत्र है। जिस देश ने सत्ता की साझेदारी को अपनाया वहाँ गृहयद्ध की संभावना समाप्त हो जाती है। सरकार के तीनों अंगों विधायिका, कार्यपालिका तथा न्यायपालिका में भी सत्ता की भागीदारी को अपनाया जाता है। इस प्रकार केन्द्रीय सरकार और राज्य सरकारों में भी सत्ता की भागीदारी के सिद्धांत पर शक्ति का बँटवारा कर दिया जाता है।


प्रश्न 5. ग्राम कचहरी के गठन एवं शक्ति का वर्णन करें।
उत्तर प्रत्येक ग्राम पंचायत क्षेत्र में न्यायिक कार्यों को सम्पन्न करने के लिए राजनैतिक दल एक ग्राम कचहरी का गठन किया जाता है। बिहार में पंचायत राज अधिनियम, 2006
के अनुसार ग्राम कचहरी का गठन निर्वाचन द्वारा किया जाता है जिसमें एक निर्वाचित सरपंच और निश्चित संख्या में निर्वाचित पंच होते हैं। प्रत्येक पंच लगभग 500 प्रतिद्वन्दिता
व्यक्ति वाले आबादी का प्रतिनिधित्व करता है। ग्राम कचहरी में भी अनुसूचित जाति, अनुसूचित तो जनजाति, पिछड़ों तथा महिलाओं के लिए ग्राम पंचायत जैसा ही आरक्षण का प्रावधान है। ग्राम कचहरी का प्रधान सरपंच होता है। निर्वाचन के बाद प्रत्येक ग्राम कचहरी अपनी पहली बैठक में निर्वाचित पंचों में से बहुमत द्वारा एक उपसरपंच का चुनाव करती है। ग्राम कचहरी का एक सचिव होता है जिसे न्यायमित्र के नाम से जाना जाता है। इसकी नियुक्ति राज्य सरकार द्वारा की जाती है। ग्राम कचहरी को भारतीय दंडसंहिता की अनेक धाराओं से संबंधित मुकदमों की सुनवाई करने का अधिकार है। यह दीवानी और फौजदारी दोनों प्रकार के म�


प्रश्न 6. संघीय व्यवस्था का गठन कैसे होता है ?
उत्तर – संघीय व्यवस्था आमतौर पर दो तरीकों से गठित होती है। कई बार स्वतंत्र और संप्रभु राज्य आपस में मिलकर सामान्य संप्रभुता स्वीकार कर एक संघीय राज्य का गठन करते हैं। आमतौर पर इस तरह से गठित संघीय व्यवस्था में राज्यों की स्वायत्तता या पहचान की भावना प्रबल होती है, अतः संघ में शामिल होने वाले राज्यों के अधिकार समान होते हैं। वे केन्द्र सरकार की अपेक्षा अधिक शक्तिशाली होते हैं क्योंकि इस तरह से गठित संघीय व्यवस्था में आमतौर पर अवशिष्ट अधिकार राज्यों के हिस्से में आते हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका, स्विटजरलैंड, आस्ट्रेलिया इस तरह से गठित संघीय राज्य के उदाहरण हैं । इसके विपरीत जब किसी बड़े देश को अनेक राजनैतिक इकाइयों में बाँटकर वहाँ स्थानीय या प्रांतीय सरकार और केन्द्र में अन्य सरकार की व्यवस्था की जाती है तब भी संघीय सरकार की स्थापना होती है। राज्यों और राष्ट्रीय सरकारों के बीच सत्ता का बँटवारा किया जाता है। भारत, बेल्जियम और स्पेन में संघीय शासन व्यवस्था की स्थापना इसी तरह से की गई है। इस तरह से गठित संघीय व्यवस्था में राज्यों की अपेक्षा केन्द्र सरकार ज्यादा शक्तिशाली होती है ।


 

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