Shram Vibhajan Aur Jati Pratha Subjective Question Answer 2023

Shram Vibhajan Aur Jati Pratha Subjective Question

दोस्तों यहां पर आपको कक्षा दसवीं हिंदी गोधूलि भाग 2 बिहार बोर्ड के लिए श्रम विभाजन और जाति प्रथा पाठ का सब्जेक्टिव प्रश्न दिया गया है। जो मैट्रिक परीक्षा 2023 के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है ।और यहाँ पर Shram Vibhajan Aur Jati Pratha का Objective Question Answer दिया गया है


इस पाठ के लेखक भीमराव अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 ई0 में महू, मध्यप्रदेश के एक दलित परिवार में हुआ था उन्होंने उच्च शिक्षा अमेरिका और लंदन से प्राप्त की ।
⇒श्रम विभाजन और जाति प्रथा पाठ भीमराव अंबेडकर के प्रसिद्ध भाषण “एनिहिलेशन ऑफ कास्ट” से लिया गया है
⇒“एनिहिलेशन ऑफ कास्ट” का हिंदी रूपांतरण ललई सिंह यादव ने किया था ।
⇒ बाबा साहब भीमराव अंबेडकर का निधन 1956 में दिल्ली में हुआ था ।
⇒उनके चिंतन व रचनात्मक के मुख्यतः तीन प्रेरक व्यक्ति बुद्ध, कबीर और ज्योतिबाफुले थे


उनकी प्रमुख रचनाएं: द कास्ट इन इंडिया,देयर मैकेनिज्म जेनेसिस एंड डेवलपमेंट, द अनटचेबल्स, हु आर शुद्राज, बुद्धिस्म एंड कम्युनिज्म, बुद्धा एंड हिस धम्मा, द राइज एंड फॉल ऑफ द हिंदू वूमेन , एनिहिलेशन ऑफ कास्ट’


1) लेखक किस विडंबना की बात करते हैं? विडंबना का स्वरूप क्या है ?
उत्तर:- लेखक के लिए विडंबना की बात यह है कि इस आधुनिक युग में भी जातिवाद के पोषक की कमी नहीं है ।


2) जातिवाद के पोषक उसके पक्ष में क्या तर्क देते हैं ?
उत्तर:- जातिवाद के पोषक इस आधुनिक समाज में कार्यकुशलता के लिए श्रम विभाजन को आवश्यक मानता है और कहते है कि जाति प्रथा भी श्रम विभाजन का ही दूसरा रूप है ।
इसलिए इसमें कोई बुराई नहीं है ।


3)जातिवाद के पक्ष में दिए गए तर्कों पर लेखक की प्रमुख आपत्तियाँ क्या है ?
उत्तर :- जातिवाद के पक्ष में दिए गए तर्कों पर लेखक की पहली आपत्ति यह है कि जाति प्रथा श्रम विभाजन के साथ-साथ लोगों का भी विभाजन करता है। श्रम विभाजन निश्चय ही सभ्य समाज की आवश्यकता है, परंतु किसी सभ्य समाज में कार्य के साथ-साथ लोगों को भी विभाजन सही विभाजन नहीं है ।


4)जाति प्रथा भारतीय समाज में श्रम विभाजन का स्वाभाविक रूप क्यों नहीं कही जा सकती ?
उत्तर – भारत की जाति प्रथा की एक और विशेषता यह है कि यह श्रमिकों का अस्वभाविक विभाजन ही नहीं करती बल्कि श्रमिकों को एक दूसरे से ऊंच-नीच को दर्शाता है। जो विश्व के किसी भी समाज में नहीं पाया जाता ।


5)जाति प्रथा भारत में बेरोजगारी का एक प्रमुख और प्रत्यक्ष कारण कैसे बनी हुई है ?
उत्तर- भारत में जाति प्रथा लोगों को कोई भी ऐसा कार्य नहीं चुनने देती जो उनके पूर्वजों ने नहीं किया हो । लोग अपने पूर्वजों का ही कार्य चुनते हैं जिसके कारण जाति प्रथा भारत में बेरोजगारी का प्रत्यक्ष और प्रमुख कारण बनी हुई है।


6) लेखक आज के उद्योगों में गरीबी और उत्पीड़न से भी बड़ी समस्या किसे मानता है और क्यों ?
उत्तर- लेखक गरीबी और उत्पीड़न से भी बड़ी समस्या जाति प्रथा को मानते हैं क्योंकि जाति प्रथा लोगों का उनके स्वभाव के अनुसार कार्य चुनने की अनुमति नहीं देती है


7)लेखक ने पाठ में किन प्रमुख पहलुओं से जाति प्रथा को एक हानिकारक प्रथा का रूप दिखाया है ?
उत्तर – इस पाठ में लेखक ने कई पहलुओं से जाति प्रथा को एक हानिकारक प्रथा बताया है । जिसमें आर्थिक और रचनात्मक पहलू सबसे प्रमुख है।


8) सच्चे लोकतंत्र की स्थापना के लिए लेखक ने किन विशेषताओं को आवश्यक माना है
उत्तर- लोकतंत्र की स्थापना के लिए लेखक ने लोगों के बीच दूध और पानी के मिश्रण जैसा भाईचारे को आवश्यक माना है

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