Siksha Aur Sanskriti Subjective Question Answer 2023

Siksha Aur Sanskriti

दोस्तों यहां पर आपको कक्षा दसवीं हिंदी गोधूलि भाग 2 बिहार बोर्ड के लिए शिक्षा और संस्कृति पाठ का सब्जेक्टिव प्रश्न दिया गया है। जो मैट्रिक परीक्षा 2023 के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है ।और यहाँ पर Siksha Aur Sanskriti का Objective Question Answer दिया गया है। जिसे आप आसानी से पढ़ सकते

पुतलीबाई और पति का नाम मोहनदास करमचंद गांधी था। गांधी जी की पत्नी का नामकस्तूरबा बाई थी। गांधीजी ने दक्षिण अफ्रीका (1893 – 1914 ) तक वकालत की थी। 

→ वह दक्षिण अफ्रीका से 1915 ई0 में भारत लौटे थे।
> गांधी जी ने पहला सत्याग्रह आंदोलन दक्षिण अफ्रीका में किया था ।
→ गांधीजी अपना हथियार सत्य और अहिंसा को मानते थे।
> वह बढ़िया शिक्षा – अहिंसक प्रतिरोध एवं हृदय की शांति को मानते थे ।
→ गांधी जी की मृत्यु 30 जनवरी 1948 ई० में हुई थी।
> गांधी जी की हत्या नाथूराम गोडसे ने की थी।
→ गांधी जी को सबसे पहले बापू कहकर – रविंद्र नाथ टैगोर ने बुलाया था |
> गांधी जी ने रविंद्र नाथ टैगोर को गुरुदेव कहा था ।
> गांधी जी के प्रसिद्ध पत्र यंग इंडिया और हरिजन है।
> गांधी जी के राजनीतिक गुरु– गोपाल कृष्ण गोखले थे ।
> 1915 में गांधीजी ने साबरमती आश्रम की स्थापना की थी।


1-गांधीजी बढ़िया शिक्षा किसे कहते हैं?
उत्तर – गांधी की बढ़िया शिक्षा अहिंसक प्रतिरोध और व्यावहारिक शिक्षा
को कहते हैं जिससे मनुष्य के चरित्र का निर्माण हो ।


2- इंद्रियों का बुद्धि पूर्वक उपयोग सीखना क्यों जरूरी है?
उत्तर- मस्तिष्क के विकास के लिए इंद्रियों को बुद्धि पूर्वक उपयोग करना आवश्यक है।
ऐसा करने से मनुष्य अपने जीवन में समय से विकास कर पाता है।


3- शिक्षा का अभिप्राय गांधीजी क्या मानते हैं ?
उत्तर- गांधीजी के अनुसार शिक्षा का अभिप्राय केवल किताबी ज्ञान से नहीं है शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जिससे शरीर बुद्धि और आत्मा तीनों का विकास हो ।


4- मस्तिष्क और आत्मा का उच्चतम विकास कैसे संभव है ?
उत्तर- गांधीजी के अनुसार बच्चे लिखना पढ़ने के साथ-साथ कुछ कारीगरी और
तालीम सीख लेंगे तब उसके मस्तिष्क और आत्मा का उच्चतम विकास होगा।


5- शिक्षा का ध्येय गांधी जी क्या मानते हैं और क्यों ?
उत्तर- गांधीजी शिक्षा शिक्षा का ध्येय व्यवहारिक शिक्षा को मानते हैं। जहां बच्चों का चरित्र निर्माण के साथ-साथ उनमें साहस बल सदाचार इत्यादि लक्षण हो क्योंकि गाँधी जी के अनुसार यही वास्तविक शिक्षा है और इसी से एक अच्छे मनुष्य का निर्माण हो सकता है ।

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